इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश में चारा घोटाले की तर्ज पर सामने आए 43 करोड़ रुपये के बहुचर्चित धान घोटाला मामले में हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले में EOW ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश कर दी है। वहीं राज्य सरकार और सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन ने अपना पक्ष व रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा, जिस पर हाईकोर्ट ने उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह की मोहलत दी है। कोर्ट ने EOW की रिपोर्ट की कॉपी याचिकाकर्ता के वकील को सौंपने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

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प्रदेश के 28 कलेक्टर्स से मांगी गई थी एक्शन टेकन रिपोर्ट

यह जनहित याचिका ‘नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच’ द्वारा दायर की गई है, जिसमें याचिकाकर्ता के वकील दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। याचिका में आशंका जताई गई है कि धान घोटाले का दायरा सिर्फ जबलपुर तक सीमित न होकर प्रदेश के अन्य जिलों में भी फैला हुआ है। इसी वजह से मामले की निष्पक्ष जांच CBI या CID से कराने की मांग की गई है। इससे पहले हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर की कार्रवाई के बाद प्रदेश के 28 जिलों के कलेक्टर्स, सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन और EOW को एक्शन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।

43 करोड़ की फर्जी खरीदी और फर्जी परिवहन का खुलासा

यह पूरा फर्जीवाड़ा जबलपुर में धान मिलिंग के नाम पर हुआ था, जिसका खुलासा तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना की जांच में हुआ था। जांच में पाया गया कि 16 करोड़ रुपये से ज्यादा की धान की केवल फर्जी खरीदी कागजों पर दिखाई गई। धान को कटनी, नागपुर, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना और मंडला भेजने का दावा किया गया था, जिसके रास्ते में मोहरा, बहोरीपार, सालीवाड़ा और शहपुरा टोल नाके पड़ते हैं। नियम के मुताबिक टोल पर डिलीवरी ऑर्डर की पर्ची दिखानी होती है, लेकिन रिकॉर्ड खंगालने पर बड़ा घोटाला उजागर हुआ।

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कार से धान परिवहन और फर्जी नंबरों का खेल

जांच में सामने आया कि धान परिवहन में दर्शाई गई 586 गाड़ियों में से महज 15 गाड़ियां ही टोल नाकों से गुजरीं, जबकि 576 वाहन कभी टोल नाके पहुंचे ही नहीं। फर्जीवाड़े का आलम यह था कि एक ही दिन में एक ही गाड़ी के उज्जैन के चार चक्कर दिखा दिए गए। जांच में ट्रकों की जगह 55 कारों और पिकअप वैन के नंबर दर्ज मिले। इसके अलावा 44 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन फर्जी पाए गए, 121 वाहनों में क्षमता से 4 गुना ज्यादा ओवरलोडिंग दिखाई गई, और कई गाड़ियों के नंबर तमिलनाडु व महाराष्ट्र के दर्ज थे। इस फर्जीवाड़े में मंडला, राजगढ़, विदिशा, उज्जैन, ग्वालियर और मुरैना जिले के राइस मिलर्स शामिल हैं।

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