Jaipur Dialogue 2026: राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार को आयोजित जयपुर डायलॉग के 11वें सम्मेलन में खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने युवाओं की बदलती भूमिका, रोजगार, ऑपरेशन सिंदूर और SIR जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश का युवा अब सिर्फ नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बन रहा है।
पिछले एक दशक में युवाओं की सोच और भूमिका में बड़ा बदलाव आया है। खेल, तकनीक, रक्षा, उद्यमिता और सनातन संस्कृति जैसे क्षेत्रों में युवा देश निर्माण में योगदान दे रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्रवाद, भारत की वैश्विक स्थिति, बॉलीवुड, विपक्ष की भूमिका और सोशल मीडिया पर नैरेटिव वॉर जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

SIR से ऑपरेशन सिंदूर तक, राठौड़ ने विपक्ष पर साधा निशाना
‘भारत को क्यों आगे बढ़ना चाहिए’ विषय पर आयोजित सत्र में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने औपचारिक भाषण देने के बजाय परिचर्चा में हिस्सा लिया। जयपुर डायलॉग के संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह संजय दीक्षित के साथ संवाद में उन्होंने विपक्षी दलों की राजनीति पर सवाल उठाए।
राठौड़ ने कहा कि विपक्षी दल आंदोलनों के जरिए अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं। SIR को लेकर उन्होंने कहा कि 1952 से अब तक 12 बार यह प्रक्रिया हो चुकी है, जिनमें 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में SIR हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव आयोग का काम है, सरकार का नहीं।
इस दौरान राठौड़ ने देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने को लेकर भी विपक्ष को घेरा। राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा का सौभाग्य है कि देश के विपक्ष में राहुल गांधी हैं।
नैरेटिव वॉर में ऑनलाइन चुनौती, ऑफलाइन भारत की मजबूत स्थिति
सम्मेलन के पहले दिन ‘नैरेटिव वॉर : भारत के उभार की कहानी कौन नियंत्रित कर रहा है?’ विषय पर भी चर्चा हुई। इस सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार गणेश भाऊ तोरसेकर, ब्रिगेडियर पांडे, आरजे रौनक, ओंकार चौधरी और करण वर्मा ने विचार रखे। सत्र का संचालन अभिजीत अय्यर मित्रा ने किया। वक्ताओं का कहना था कि नैरेटिव की लड़ाई में भारत को ऑनलाइन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि ऑफलाइन उसकी स्थिति मजबूत हो रही है।
गणेश भाऊ तोरसेकर ने कहा कि हार का नैरेटिव लोगों के दिमाग में बैठाया जाता है, जबकि भारत कई मौकों पर अपनी बात रखने और नैरेटिव जीतने में सफल रहा है। वहीं, ओंकार चौधरी ने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी दबाव के बीच भारत की कार्रवाई को लेकर हार का नैरेटिव बनाने की कोशिश हुई। उनके मुताबिक, भारत अपनी सैन्य कार्रवाई और सॉफ्ट पावर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाया। उन्होंने नैरेटिव वॉर में सांस्कृतिक ताकत और संचार रणनीति को समझने की जरूरत बताई।
बदलती दुनिया में भारत की रणनीति पर मंथन
‘खतरनाक दुनिया में भारत : क्या विदेशी ताकतें अस्थिरता पैदा कर रही हैं?’ विषय पर आयोजित सत्र में लेखक सुशांत सरीन, सुमित पीर, तिलक देवाशेर और मेजर समीर पाल तूर ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में भारत की चुनौतियों और रणनीतियों पर चर्चा की।
वक्ताओं ने नई पीढ़ी को भारतीय सभ्यता और संस्कृति से परिचित कराने पर जोर दिया। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और सामाजिक सुधार के लिए क्रांतिकारी कदम उठाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए पारिवारिक मूल्यों का मजबूत होना भी जरूरी है।
बॉलीवुड की फिल्मों में सनातन संस्कृति के चित्रण पर सवाल
जयपुर डायलॉग में बॉलीवुड की भूमिका पर भी चर्चा हुई। ‘हाउ बॉलीवुड मिसगाइडेड इंडिया?’ विषय पर आयोजित सत्र में लेखिका अमी गणात्रा, पत्रकार हर्ष कुमार, अभिषेक तिवारी, साहित्यकार अनुपम मिश्र और सूजैन बर्नेट ने हिस्सा लिया।
वक्ताओं ने फिल्मों में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के चित्रण पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि बॉलीवुड की साख प्रभावित हुई है और उसे अपनी सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। हालांकि, क्रिएटिव लिबर्टी और फिल्मों में धार्मिक प्रस्तुतिकरण को लेकर अलग-अलग विचार भी सामने आए।
इसके बाद हुए एक अन्य सत्र में देश के भीतर वैचारिक विरोध, कथित दिमागी नक्सलवाद, चरमपंथ और राजनीतिक असंतोष जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
सनातन विचारधारा के लिए अपना इकोसिस्टम बनाने पर जोर
‘सिस्टम तो हमारा है : सीजेपी’ सत्र में वक्ताओं ने भारत के खिलाफ वैचारिक इकोसिस्टम तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा से जुड़े लोगों को भी अपना इकोसिस्टम विकसित करने की जरूरत है।
इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ाने, वेद-उपनिषदों की सरल टीकाएं तैयार करने और नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस सत्र में हर्ष कुमार, अंकुर आर्य, शांतनु गुप्ता और अभिषेक तिवारी ने अपने विचार रखे।
मिसाइल और ड्रोन के दौर में बदल रहा युद्ध का स्वरूप
सम्मेलन के एक अन्य सत्र में पश्चिम एशिया और इस्लामिक देशों की भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। मेजर जनरल राजीव नारायणन, सुमित पीर, सुशांत सरीन और आदि अचिंत ने युद्ध की बदलती रणनीतियों पर अपनी बात रखी।
वक्ताओं ने कहा कि अब युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। आमने-सामने की सैन्य लड़ाई के बजाय मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इस दौरान ईरान, इराक, सऊदी अरब और पाकिस्तान की अलग-अलग रणनीतियों और आर्थिक चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।
विवादित राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा
जयपुर डायलॉग के पहले दिन कई अन्य विषयों पर भी सत्र आयोजित किए गए। ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा’ सत्र में कानून-व्यवस्था, हेट स्पीच और राजनीतिक नारों के संदर्भ में विचार रखे गए। वहीं, ‘एससी/एसटी एक्ट कंट्रोवर्सी’ सत्र में सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति और राजनीतिक व्यवस्था पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने सांस्कृतिक विरासत को समझने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत बताई।
तीन पुस्तकों का विमोचन, तीन दिवसीय सम्मेलन में कई विषयों पर चर्चा
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर ओमेंद्र रत्नू और जय आहूजा की पुस्तक ‘पाकिस्तान के हिंदू व सिख : एक अनवरत नरसंहार’ का विमोचन किया गया। इसके अलावा अमी गणात्रा की पुस्तक ‘द वॉइस एंड द लेक ऑफ रिडल्स’ और शांतनु गुप्ता की पुस्तक ‘बुलडोजर बाबा’ भी जारी की गईं।
तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन ‘सिविल वार होने वाला है?’, ‘ब्रिक्स बनाम जी-7 : ट्रंप बनाम मोदी’, ‘भारत की कश्मीर नीति और अफ-पाक’, ‘भारत में मनुस्मृति विवाद’, ‘सीजेपी को विदेशी एजेंटों द्वारा वित्त पोषित किया गया था? सरकार की भूमिका’, ‘भारतीय विवाहों का खंडन : जेन-जी शादी क्यों नहीं करना चाहता’ और ‘हमारी सभ्यता और नई पीढ़ी’ जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
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