Jaipur Divorce Case: जयपुर की फैमिली कोर्ट-2 ने पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए मई 2013 में हुई शादी को खत्म करने का फैसला सुनाया। मामले में पत्नी के दूसरे पुरुष के साथ संबंध, उसके लिए करवा चौथ रखने और उसके नाम की मेहंदी लगाने जैसी बातों का उल्लेख किया गया। अदालत ने पति-पत्नी के बीच लंबे समय से बनी दूरी और परिवार से जुड़े दूसरे पहलुओं पर भी विचार किया।

मामले में सामने आए तथ्यों के अनुसार, पत्नी ने शादीशुदा होने के बावजूद दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ रखा और उसके नाम की मेहंदी लगाई। यह भी बताया गया कि वह गोवा में उस पुरुष के साथ फेरे लेकर उसके साथ पति-पत्नी की तरह रह रही थी। अदालत ने इन घटनाओं को वैवाहिक रिश्ते में भरोसे और जिम्मेदारियों के संदर्भ में अहम माना। मामले में सामने आए घटनाक्रम को सामान्य दोस्ती से आगे का व्यवहार माना गया, जो पति-पत्नी के संबंधों पर असर डालने वाला था।

पति-पत्नी के बीच लंबे समय से नहीं थे संबंध

तलाक की याचिका में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से शारीरिक संबंध नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने वैवाहिक जीवन में लगातार दूरी बनाए रखने और दांपत्य जिम्मेदारियां नहीं निभाने से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार किया। फैसले में इन परिस्थितियों को पति को हुई मानसिक परेशानी और मानसिक क्रूरता के संदर्भ में देखा गया।

बेटे की देखभाल और ससुराल वालों से व्यवहार का भी जिक्र

मामले में नाबालिग बेटे की देखभाल और पति के माता-पिता के साथ पत्नी के व्यवहार से जुड़े पहलू भी उठाए गए। अदालत के समक्ष यह बात आई कि बेटे की उचित देखभाल नहीं की गई और पति के माता-पिता के साथ व्यवहार भी अनुचित रहा। इन पहलुओं सहित वैवाहिक संबंधों से जुड़े घटनाक्रम पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि पति के लिए इस रिश्ते में भरोसा और मानसिक शांति बनाए रखना मुश्किल हो गया था।

मई 2013 में हुई थी शादी

पति-पत्नी की शादी मई 2013 में हुई थी। वैवाहिक संबंधों में आई परेशानियों और मामले में सामने आए घटनाक्रम के आधार पर पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए करीब 13 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते को खत्म करने का फैसला सुनाया।

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