Jaisalmer CMHO Controversy: जैसलमेर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के पद को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। राजस्थान हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद पूर्व CMHO डॉ. राजेंद्र कुमार पालीवाल ने पद पर दोबारा जॉइनिंग करने का दावा किया है।

वहीं, मौजूदा CMHO डॉ. मुरलीधर सोनी का कहना है कि उनके कार्यालय में डॉ. पालीवाल ने कोई जॉइनिंग नहीं की है। ऐसे में एक ही पद को लेकर दोनों अधिकारियों के अलग-अलग दावों से स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक स्थिति पेचीदा हो गई है।

हाईकोर्ट की अंतरिम राहत के बाद जॉइनिंग का दावा

डॉ. राजेंद्र कुमार पालीवाल का तबादला होने के बाद उन्होंने तबादला आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले में हाईकोर्ट की ओर से अंतरिम राहत दी गई। इसके बाद डॉ. पालीवाल की ओर से CMHO पद पर दोबारा जॉइनिंग किए जाने की बात सामने आई। डॉ. पालीवाल का कहना है कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश के बाद जॉइन किया है। उनका कहना है कि अगर जॉइनिंग उच्च स्तर पर होनी है, तो वे अपने उच्चाधिकारियों और संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारियों के समक्ष जॉइन करेंगे।

मौजूदा CMHO ने जॉइनिंग के दावे पर क्या कहा?

मौजूदा CMHO डॉ. मुरलीधर सोनी ने डॉ. पालीवाल की जॉइनिंग को लेकर अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि उनके कार्यालय में डॉ. पालीवाल ने कोई जॉइनिंग नहीं की। डॉ. सोनी के अनुसार, यदि कोई अधिकारी उनके कार्यालय में जॉइन करता है तो उसकी जॉइनिंग उनके हस्ताक्षर से होगी। लेकिन अभी तक उनके कार्यालय को डॉ. पालीवाल की जॉइनिंग से संबंधित कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।

कोर्ट के आदेश की व्याख्या पर भी मतभेद

डॉ. मुरलीधर सोनी के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश में ऐसा कोई निर्देश नहीं है कि डॉ. पालीवाल को सीधे CMHO कार्यालय में जॉइन करवाया जाए। उनका कहना है कि कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को उन सक्षम अधिकारियों के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा है, जो पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं। डॉ. सोनी के मुताबिक, संबंधित अधिकारी अपना पक्ष उच्चाधिकारियों के सामने रख सकते हैं। इसके बाद सक्षम स्तर से इस पर निर्णय लिया जाना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कलेक्टर या स्वास्थ्य विभाग के किसी उच्च अधिकारी को इस संबंध में पत्र लिखा गया है, तो संबंधित अधिकारी अपने स्तर पर अपना पक्ष रख सकते हैं। अंतिम प्रशासनिक निर्णय सक्षम उच्चाधिकारी के स्तर से ही होगा।

पहले ही कार्यमुक्त हो चुके हैं डॉ. पालीवाल

डॉ. सोनी ने कहा कि पूर्व CMHO डॉ. राजेंद्र कुमार पालीवाल को पहले ही जैसलमेर से कार्यमुक्त किया जा चुका था। ऐसे में उच्चाधिकारियों के आदेश के बिना उनकी दोबारा जॉइनिंग नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार की ओर से उन्हें CMHO की जिम्मेदारी दी गई है और वे अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। सरकार या सक्षम अधिकारी की ओर से आगे जो आदेश प्राप्त होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, डॉ. पालीवाल का पक्ष इससे अलग है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद उन्होंने जॉइनिंग की है। यदि जॉइनिंग का विषय उच्चाधिकारियों के स्तर पर तय होना है तो वे संबंधित उच्चाधिकारियों के समक्ष जॉइन करेंगे। इस तरह जैसलमेर में CMHO पद को लेकर फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक तरफ पूर्व CMHO हाईकोर्ट की अंतरिम राहत के आधार पर जॉइनिंग का दावा कर रहे हैं, जबकि मौजूदा CMHO का कहना है कि उनके कार्यालय में ऐसी कोई जॉइनिंग नहीं हुई है और आगे का फैसला सक्षम उच्चाधिकारी के स्तर से होना है।

पढ़ें ये खबरें