Jaisalmer News: राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में रविवार को छह माह के एक नर गोडावण की रेगिस्तानी लोमड़ी के हमले में मौत हो गई। इस पक्षी को बुधवार को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया था।

गोडावण के दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजाति होने के कारण इस घटना के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और वन विभाग ने पुनर्वास कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला किया है। अब अगले चरण में छोड़े जाने वाले सात गोडावणों को सुरक्षा उपायों और संरक्षण प्रोटोकॉल की समीक्षा के बाद ही जंगल में छोड़ा जाएगा।

प्राकृतिक जलस्रोत पर पानी पीते समय हुआ हमला

भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक गोबिंद सागर भारद्वाज के मुताबिक, छह माह का नर गोडावण डेजर्ट नेशनल पार्क में एक प्राकृतिक जलस्रोत पर मौजूद था। इसी दौरान रेगिस्तानी लोमड़ी ने उस पर हमला कर दिया।

पक्षी की गतिविधियों पर सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए नजर रखी जा रही थी। सम स्थित गोडावण प्रजनन केंद्र के कंट्रोल रूम में निगरानी कर रहे वैज्ञानिकों और वन विभाग की टीम को ट्रैकिंग के जरिए घटना की जानकारी मिली। टीम तत्काल मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक पक्षी की मौत हो चुकी थी।

घटनास्थल पर गोडावण के क्षत-विक्षत अवशेष और पंख मिले। अधिकारियों ने रक्त के नमूने एकत्र किए। साथ ही, पक्षी के शरीर पर लगाया गया सैटेलाइट ट्रैकिंग उपकरण भी बरामद कर लिया गया।

जंगल में छोड़े जाने वाले गोडावणों की सुरक्षा की समीक्षा

घटना के बाद गोडावणों को प्राकृतिक आवास में फिर से स्थापित करने की योजना के सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जा रही है। कार्यक्रम के तहत आगे छोड़े जाने वाले सात गोडावणों को विस्तृत समीक्षा के बाद ही जंगल में छोड़ा जाएगा।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमित गश्त और सुरक्षा उपायों के बावजूद यह घटना हुई। रेगिस्तानी लोमड़ी डेजर्ट नेशनल पार्क के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। ऐसे में जंगल में छोड़े गए पक्षियों के सामने शिकारी जीवों का खतरा बना रहता है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक गोबिंद सागर भारद्वाज ने कहा कि जंगल में शिकार होना प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि जमीन पर काम कर रही टीमें पूरी तरह प्रेरित हैं और इस तरह की घटनाएं गोडावण संरक्षण योजना के उद्देश्यों को हासिल करने के उनके संकल्प को और मजबूत करेंगी।

पहले चरण में 11 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना

गोडावण की आबादी बढ़ाने और उसे प्राकृतिक आवास में फिर से स्थापित करने के लिए प्रयोगात्मक पुनर्वास कार्यक्रम का पहला चरण शुरू किया गया है। इसके तहत कैद में प्रजनन के जरिए जन्मे करीब छह माह की उम्र के 11 गोडावणों को जंगल में छोड़ने के लिए चिह्नित किया गया था।

चार अक्टूबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैसलमेर के सम क्षेत्र स्थित सुदासरी रिलीज साइट पर सैटेलाइट टैग लगाए गए दो नर गोडावणों को जंगल में छोड़ने की शुरुआत की थी। दोनों पक्षियों का जन्म भारतीय वन्यजीव संस्थान के सम स्थित प्रजनन केंद्र में हुआ था।

इसके बाद बुधवार को इसी स्थल पर दो और नर गोडावणों को जंगल में छोड़ा गया। इनमें से एक की रविवार को रेगिस्तानी लोमड़ी के हमले में मौत हो गई।

बाकी गोडावणों की गतिविधियों पर नजर

वन विभाग के अनुसार, जंगल में छोड़े गए अन्य तीन गोडावण सुरक्षित हैं। वे डेजर्ट नेशनल पार्क में अलग-अलग स्थानों पर विचरण कर रहे हैं। सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

एक गोडावण की मौत के बाद अब पुनर्वास कार्यक्रम में सुरक्षा उपायों की समीक्षा पर जोर दिया जा रहा है। अगले सात पक्षियों को जंगल में छोड़ने से पहले संबंधित प्रोटोकॉल की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

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