Jaisalmer Nagar Nikay Chunav की तारीखें नजदीक आते ही भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। जैसलमेर में पिछली बार सबसे ज्यादा पार्षद जीतने के बावजूद सभापति की कुर्सी गंवा चुकी भाजपा इस बार टिकट वितरण से लेकर बोर्ड गठन तक कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

पिछले चुनाव में 45 वार्डों में भाजपा ने 21, कांग्रेस ने 20 और निर्दलीयों ने 4 सीटें जीती थीं। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सभापति चुनाव में उसके 21 पार्षदों में से सिर्फ 13 ने पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया और पूरा समीकरण बदल गया।

21 में से सिर्फ 13 पार्षदों ने BJP प्रत्याशी को दिया वोट

पिछले नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने 45 वार्डों में प्रत्याशी उतारे थे। एक प्रत्याशी के अंतिम समय में नामांकन वापस लेने के बाद पूर्व विधायक स्वर्गीय गोवर्धनदास कल्ला के भतीजे हरिवल्लभ कल्ला निर्विरोध पार्षद बने थे। बाद में कांग्रेस के बागी हरिवल्लभ कल्ला निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सभापति चुनाव में उतरे।

सभापति पद के लिए कांग्रेस ने कमलेश छंगाणी और भाजपा ने विक्रम सिंह को मैदान में उतारा। नतीजे में हरिवल्लभ कल्ला को 19, भाजपा के विक्रम सिंह को 13 और कांग्रेस के कमलेश छंगाणी को 12 वोट मिले। एक वोट निरस्त हुआ। इस तरह 21 पार्षद होने के बावजूद भाजपा अपने उम्मीदवार के पक्ष में केवल 13 वोट ही जुटा सकी और सभापति की कुर्सी हाथ से निकल गई।

BJP ने बदला टिकट का फॉर्मूला

पिछले चुनाव के घटनाक्रम से सबक लेते हुए भाजपा इस बार टिकट चयन को लेकर कई स्तर पर सर्वे करा रही है। भाजपा जिलाध्यक्ष दलपत हिंगड़ा के मुताबिक टिकट में जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी ऐसे उम्मीदवारों की तलाश में है जो चुनाव जीतने की स्थिति में हों और पार्टी के प्रति निष्ठावान भी रहें। सर्वे में मजबूत स्थिति वाले दावेदारों को टिकट में प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है।

पैराशूट उम्मीदवारों पर ब्रेक

पिछली बार पैराशूट उम्मीदवारों को लेकर उठे सवालों के बीच भाजपा इस बार स्थानीय और पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताने की बात कह रही है। पार्टी का दावा है कि टिकट वितरण में किसी तरह का समझौता नहीं होगा। वार्ड प्रभारियों के जरिए अलग-अलग वार्डों में बैठकें की जा रही हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं और वार्डवासियों से फीडबैक लिया जा रहा है। पार्टी के मुताबिक टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार सामने आए हैं।

OBC लॉटरी से बदले कई वार्डों के समीकरण

इस बार OBC आरक्षण की लॉटरी ने भी जैसलमेर के कई वार्डों का चुनावी गणित बदल दिया है। कुल 9 सीटें OBC के लिए आरक्षित हुई हैं। वार्ड 16, 17 और 18 जैसे ब्राह्मण-माहेश्वरी बहुल इलाकों के साथ वार्ड 20 और 34 जैसे मिश्रित सामाजिक समीकरण वाले वार्डों में उम्मीदवार चयन अहम माना जा रहा है। भाजपा का कहना है कि इन वार्डों में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवार की पकड़ और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर फैसला किया जाएगा।

सभापति पद पर BJP ने अभी नहीं खोले पत्ते

पिछली बार सभापति चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद भाजपा इस बार पहले से रणनीति तैयार कर रही है। जिलाध्यक्ष दलपत हिंगड़ा के मुताबिक सभापति का फैसला चुनाव जीतकर आने वाले भाजपा पार्षद करेंगे। यानी पार्टी ने फिलहाल किसी एक चेहरे को सभापति पद का दावेदार घोषित नहीं किया है। पहले ज्यादा से ज्यादा पार्षद जिताने और उसके बाद पार्षदों की राय से सभापति चुनने का फॉर्मूला अपनाया जा रहा है।

जैसलमेर में इस बार भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती केवल वार्ड जीतना नहीं, बल्कि जीते हुए पार्षदों को एकजुट रखना भी होगी। पिछली बार का अनुभव पार्टी के सामने है और इसी वजह से टिकट चयन से लेकर सभापति चुनाव तक उसकी रणनीति में बदलाव साफ नजर आ रहा है।

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