जमशेदपुर। गोलमुरी स्थित केनरा बैंक में हुई सनसनीखेज डकैती के 16 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। देश की बड़ी बैंक डकैतियों में शुमार इस वारदात ने पुलिस की कार्यशैली और बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड पुलिस की एसआईटी और अन्य जांच एजेंसियां तकनीकी अनुसंधान के जरिए संदिग्धों की पहचान करने का दावा कर रही हैं, लेकिन अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। करीब 23 किलो सोने के आभूषण और 43 लाख रुपये नकद की लूट के मामले में पुलिस कई राज्यों में छापेमारी कर रही है।

चार आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में जांच, फिर भी नतीजा नहीं

मामले की जांच में भौतिक साक्ष्यों के साथ तकनीकी सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस का सहारा लिया जा रहा है। चार आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में 20 डीएसपी, इंस्पेक्टर और थानेदार स्तर के अधिकारी तथा 10 विशेषज्ञों की तकनीकी टीम आरोपियों की तलाश में जुटी है। इसके बावजूद एसआईटी को अब तक ठोस सफलता नहीं मिली है।

होटलों और लॉज में ठहरकर की गई थी बैंक की रेकी

जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि डकैती से पहले अपराधियों ने शहर के अलग-अलग होटलों और लॉज में ठहरकर बैंक की गतिविधियों पर नजर रखी थी। साकची के टीना शेड इलाके स्थित एक लॉज में एक संदिग्ध के ठहरने की भी पुष्टि होने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि अपराधियों ने स्थानीय मददगारों के जरिए शहर की भौगोलिक स्थिति, बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और भागने के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाई थी।

मूसलाधार बारिश का उठाया फायदा, कुछ ही मिनटों में लूट

वारदात के दिन तेज बारिश हो रही थी। बताया जाता है कि अपराधी रेनकोट पहनकर बैंक में दाखिल हुए, ताकि उनकी पहचान करना मुश्किल हो। हथियारों के बल पर बैंककर्मियों को बंधक बनाकर उन्होंने आयरन सेफ और लॉकर से करीब 23 किलो सोने के आभूषण और 43 लाख रुपये नकद लूट लिए।

पांच आरोपियों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम

पुलिस ने पहचान किए गए पांच आरोपियों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। इनमें दर्शन कुमार उर्फ प्रियदर्शी (समस्तीपुर), अक्षय कुमार उर्फ साका (पटना), अमन सिंह (वर्धमान), ऋतिक कुमार (पूर्वी चंपारण) और एक अन्य आरोपी शामिल है। सभी पर घोषित इनाम की कुल राशि 10 लाख रुपये है।

बिहार से बंगाल तक छापेमारी, ओडिशा और नेपाल सीमा पर भी नजर

आरोपियों की तलाश में पुलिस ने बिहार के समस्तीपुर, पटना और पूर्वी चंपारण के अलावा पश्चिम बंगाल के वर्धमान में छापेमारी की है। वहीं, ओडिशा और नेपाल सीमा से जुड़े संभावित ठिकानों तथा मार्गों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने घटना के समय गोलमुरी बैंक क्षेत्र में सक्रिय मोबाइल टावरों से मिले डेटा का विश्लेषण किया है। टावर डंप और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों और उनके अंतरराज्यीय संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।

100 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले

जांच टीम ने बैंक से लेकर अपराधियों के संभावित भागने के रास्तों तक 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले हैं। इनमें परसुडीह, सुंदरनगर, पोटका और ओडिशा सीमा की ओर जाने वाले रास्ते शामिल हैं। फुटेज के जरिए संदिग्धों की गतिविधियों, हुलिये और इस्तेमाल की गई बाइकों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस ने संदिग्धों के वीडियो भी सार्वजनिक किए हैं। आरोपी अमन सिंह के शरीर पर बने विशिष्ट टैटू को उसकी पहचान के एक संभावित आधार के रूप में देखा जा रहा है।

बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने बैंक की सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों को उजागर किया है। शुरुआती जांच के आधार पर सुरक्षा गार्ड की भूमिका, अलार्म सिस्टम और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

बताया गया है कि वारदात के दौरान सुरक्षा गार्ड ने विरोध किया, जिसमें वह घायल हो गया। अपराधियों ने सुबह करीब 9:10 बजे बैंक में धावा बोला था। आरोप है कि वे काफी देर तक बैंक के भीतर रहे और सेफ व लॉकर से सोने के पैकेट तथा नकदी निकालते रहे, लेकिन तत्काल पुलिस को अलर्ट करने वाली व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हुई।

बैंक के मुख्य दरवाजे खोलने के दौरान बाहरी गतिविधियों पर निगरानी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा संबंधी इन बिंदुओं पर जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

सुबोध सिंह गिरोह से जुड़े होने का संदेह

जांच में यह भी दावा किया जा रहा है कि आरोपी कुख्यात अंतरराज्यीय सुबोध सिंह गिरोह से जुड़े हैं। बताया जाता है कि इस गिरोह का नेटवर्क राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत कई राज्यों तक फैला है और यह कथित तौर पर बैंक डकैती की वारदातों में शामिल रहा है।

पुलिस को आशंका है कि वारदात के बाद अपराधियों ने मोटरसाइकिल और अन्य परिवहन साधनों का इस्तेमाल कर राज्य की सीमाएं पार कीं। उनके परसुडीह, सुंदरनगर और पोटका होते हुए ओडिशा की ओर भागने की संभावना की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि संदिग्धों की पहचान और कई राज्यों में छापेमारी के बावजूद पुलिस अब तक आरोपियों तक क्यों नहीं पहुंच सकी है। करीब 23 किलो सोने और 43 लाख रुपये की इस लूट में बरामदगी और गिरफ्तारी का इंतजार बना हुआ है।