पटना। बिहार की राजनीति में जमुई की एक नाबालिग पीड़िता और उसके स्वजन के साथ बिहार के मुख्यमंत्री की तस्वीर सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इस तस्वीर के सार्वजनिक होने से पीड़िता की पहचान उजागर हुई है, जो कानूनन गलत है।

​तेजस्वी और मीसा भारती का तीखा हमला

​नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को साझा किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने POCSO एक्ट की धारा 23 का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा।

  • ​कानूनी प्रावधान: पॉक्सो एक्ट की धारा 23(2) के तहत किसी भी मीडिया या सार्वजनिक मंच पर बच्चे की पहचान (नाम, फोटो, पता या परिवार की जानकारी) उजागर करना प्रतिबंधित है।
  • ​सजा का प्रावधान: धारा 23(4) के अनुसार इसका उल्लंघन करने पर छह महीने से एक वर्ष तक की सजा या जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं।
  • ​कार्रवाई की मांग: तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब पुलिस ऐसे मामलों में दूसरों पर कार्रवाई कर रही है, तो मुख्यमंत्री के हैंडल से तस्वीर आने पर कानून क्या करेगा? वहीं, राजद सांसद मीसा भारती ने भी इस मामले में बिहार पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

​क्या है पूरा मामला?

​मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जमुई की नाबालिग पीड़िता न्याय की गुहार लगाने अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची थी। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार को तुरंत न्याय और कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। इसी मुलाकात की तस्वीर को जब सोशल मीडिया पर साझा किया गया, तब जाकर पहचान उजागर होने को लेकर राजनीतिक बवाल शुरू हुआ।

​जमुई की घटना

​यह पूरा विवाद 19 सितंबर को जमुई में हुई एक घटना से जुड़ा है। कोचिंग से लौट रहे एक नाबालिग लड़के और लड़की को कुछ युवकों ने रास्ते में रोककर बदसलूकी की थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपियों के खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है।