जापान के यामानाशी प्रांत के राज्यपाल कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में 75 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को सारनाथ का भ्रमण किया. प्रतिनिधिमंडल ने धामेक और चौखंडी स्तूप समेत प्रमुख स्थलों का दौरा कर भारत-जापान के बौद्ध और सांस्कृतिक संबंधों को महसूस किया.
सतीश सिंह, वाराणसी. जापान के यामानाशी प्रांत के राज्यपाल कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में 75 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को सारनाथ का दौरा किया. राज्यपाल की पत्नी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थीं. मेहमानों ने धामेक स्तूप, चौखंडी स्तूप और अन्य प्रमुख स्थलों का भ्रमण कर भगवान बुद्ध की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को करीब से जाना.

यूनेस्को मान्यता के बाद दौरा
सारनाथ को हाल ही में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में जगह मिलने के बाद इस यात्रा को खास माना जा रहा है. इस मान्यता के साथ सारनाथ देश का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन चुका है.
इससे प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिली है.

वैश्विक पहचान मजबूत
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सारनाथ की यूनेस्को मान्यता से उत्तर प्रदेश की बौद्ध पर्यटन पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है. उन्होंने बताया कि जापानी प्रतिनिधिमंडल का आगमन भारत-जापान के प्राचीन बौद्ध और सांस्कृतिक रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाने का अच्छा अवसर है.
उन्होंने कहा कि इससे जापानी पर्यटकों की संख्या बढ़ने और प्रदेश की बौद्ध विरासत से उनके परिचय की संभावनाएं बढ़ी हैं.
यात्रा को बताया यादगार
प्रतिनिधिमंडल की सदस्य युमी साइटो ने यात्रा को यादगार बताया. उन्होंने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सारनाथ पहुंचकर भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल और स्तूपों को देखना भारत व जापान के साझा आध्यात्मिक संबंधों को महसूस करने जैसा अनुभव था.

इस दौरे ने दोनों क्षेत्रों के बीच बौद्ध और सांस्कृतिक पर्यटन की नई संभावनाओं को रेखांकित किया है. सारनाथ अब विदेशी पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों के बीच तेजी से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभर रहा है.

