जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने जौहर ट्रस्ट को भी जांच में शामिल किया है. ट्रस्ट के नौ पदाधिकारियों में आजम खां के परिवार के पांच सदस्य शामिल रहे हैं, जिनमें पत्नी तजीन फातिमा, बेटे अदीब और अब्दुल्ला तथा बहन निकहत अफलाक के नाम हैं.

आगरा. रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां से जुड़े जौहर ट्रस्ट को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में शामिल किए जाने के बाद अब इसके अन्य पदाधिकारी भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में आ गए हैं. ट्रस्ट में आजम खां की पत्नी तजीन फातिमा, दोनों बेटे अदीब और अब्दुल्ला तथा बहन निकहत अफलाक पदाधिकारी रह चुके हैं. ट्रस्ट के कुल नौ सदस्यों में पांच आजम खां के परिवार से जुड़े हैं.

ईडी ने 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को भी शामिल किया है. इसी ट्रस्ट के माध्यम से जौहर विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया था. विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के कथित इस्तेमाल और फर्जी फर्मों के जरिए चंदा जुटाने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है.

ट्रस्ट में परिवार के पांच सदस्य

आजम खां ने वर्ष 1990 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना की थी. वह इसके संस्थापक अध्यक्ष बने थे. ट्रस्ट में उनकी पत्नी तजीन फातिमा को सचिव, बहन निकहत अफलाक को कोषाध्यक्ष और दोनों बेटों अदीब व अब्दुल्ला को सदस्य बनाया गया था.

अन्य पदाधिकारियों में मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष, चमरौवा के सपा विधायक नसीर अहमद खां को संयुक्त सचिव और सलीम कासिम को सदस्य की जिम्मेदारी दी गई थी. इस तरह ट्रस्ट के नौ सदस्यों में पांच आजम खां के परिवार से थे.

ईडी का आरोप है कि परिवार के अलावा शामिल किए गए चार अन्य सदस्यों को केवल नाम के लिए ट्रस्ट में रखा गया था. आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला कई मामलों में अभियुक्त बनाए जा चुके हैं. दोनों फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परिवार में बड़े बेटे अदीब और बहन निकहत अफलाक को अब तक किसी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है.

सजा के बाद बदला कार्यकारिणी का स्वरूप

दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में सजा सुनाए जाने के बाद आजम खां ने ट्रस्ट से अपना, पत्नी तजीन फातिमा और छोटे बेटे अब्दुल्ला का नाम हटवा दिया था. इसके बाद ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी बनाई गई.

नई व्यवस्था में निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे अदीब को सचिव बनाया गया. इनके अलावा मुश्ताक अहमद सिद्दीकी, नसीर अहमद खां, जावेद उर रहमान खान, मुमताज बी और शहरेयार सलीम को भी कार्यकारिणी में शामिल किया गया.

सरकारी धन के इस्तेमाल का आरोप

ईडी की ओर से दर्ज प्राथमिकी में जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण के दौरान सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, कमीशनखोरी और करीब 400 करोड़ रुपये के बिना हिसाब खर्च किए जाने के आरोप शामिल हैं. इन आरोपों से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य होने की बात भी सामने आई है.

इसी आधार पर ट्रस्ट से जुड़े रहे अदीब, तजीन फातिमा और निकहत अफलाक की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है. इस मामले में अजीमनगर थाने की पुलिस के साथ ईडी की ओर से भी कार्रवाई की जा सकती है.

विधायक समेत सदस्यों से पूछताछ

जांच के दौरान ईडी जौहर ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है. इनमें चमरौवा के सपा विधायक नसीर अहमद खां भी शामिल हैं.

पूछताछ के दौरान ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया था कि उन्हें ट्रस्ट की बैठकों में शामिल नहीं किया जाता था. ईडी इस मामले में ट्रस्ट के कामकाज और उसके पदाधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है.

किसानों की जमीन से शुरू हुई जांच

जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की जमीन पर कथित कब्जे का मामला ईडी की जांच का एक प्रमुख आधार बना. एजेंसी के आधिकारिक प्रेस वक्तव्य के अनुसार, जुलाई 2019 में रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई थी.

इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सिंगनखेड़ा गांव के किसानों की कृषि भूमि जबरन कब्जाई गई. किसानों के साथ मारपीट करने, उन्हें अवैध रूप से बंधक बनाने और धमकियां देकर जमीन के बैनामे कराने के आरोप भी लगाए गए थे.

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित सरकारी धनराशि और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया. आरोप है कि सरकारी कामों को विश्वविद्यालय के निजी परिसर में कराया गया था.

इसके अलावा सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से रकम लेकर उसे ट्रस्ट को चंदे के रूप में वापस दिए जाने का आरोप भी है. एजेंसी ने 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में दर्ज एक अन्य प्राथमिकी के साथ रामपुर में लूट, वसूली, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े 28 अन्य मुकदमों को भी जांच में शामिल किया है.