आगरा के जैंगारा गांव में रालोद की स्वाभिमान सभा में केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के चवन्नी वाले तंज पर पलटवार किया. उन्होंने आलू किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए क्षेत्र में आलू बोर्ड बनाने और आलू उत्पादों के प्रचार की जरूरत बताई.

आगरा. जिले के फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र के जैंगारा गांव में आयोजित राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की स्वाभिमान सभा में केंद्रीय मंत्री और पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चवन्नी वाले तंज पर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ब्रज की मिट्टी के सामने उनकी अपनी कोई हैसियत नहीं है. सभा में उन्होंने संगठन की ताकत, किसानों की समस्याओं और आगरा क्षेत्र में आलू बोर्ड बनाने की मांग पर भी अपनी बात रखी.

अखिलेश यादव पर पलटवार

सभा को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि उन्होंने राजनीति में हार और जीत दोनों का अनुभव किया है. उनके मुताबिक, इस क्षेत्र के लोग स्वाभिमान से जीते हैं और देश के लिए जान देने वालों तथा अपनी मिट्टी के सामने ही सिर झुकाते हैं.

अखिलेश यादव की टिप्पणी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “आप बोल गए. मगर, तीर ठीक नहीं बैठा है.” जयंत चौधरी ने कहा कि उन्हें अपनी कीमत बताने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ब्रज की मिट्टी के सामने वह खुद को चुटकी भर के बराबर भी नहीं मानते.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में रालोद के विधायकों की संख्या कम होने के बावजूद पार्टी की अपनी राजनीतिक ताकत है. उन्होंने दावा किया कि पहले गठबंधन के दौरान तीन राज्यसभा सांसद बने थे, जबकि अब एक सांसद भेजा जा रहा है. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार के समय रालोद के एक विधायक की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायक मंत्री भी बने थे.

आगरा और ब्रज की पहचान

जयंत चौधरी ने आगरा की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का उल्लेख करते हुए ताजमहल, नक्काशी और जूता उद्योग की चर्चा की. उन्होंने कहा कि आगरा की पहचान से जुड़े पेठे का जिक्र भी होना चाहिए और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस विषय पर बात नहीं की, जबकि वह चीनी और गन्ने की चर्चा करते हैं.

उन्होंने एत्मादपुर के बगलघुसा गांव का नाम बदलकर अजीतगढ़ किए जाने का भी उल्लेख किया. जयंत चौधरी के अनुसार, चौधरी अजीत सिंह को यह सम्मान वर्ष 1987 में मिला था.

सभा में दिल्ली से उद्यमियों के आने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भारतीय स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है. उन्होंने खेती-किसानी को मेहनत वाला काम बताया और कहा कि कृषि आज भी किसानों के लिए हमेशा मुनाफे का सौदा नहीं बन पाती.

आलू बोर्ड बनाने की मांग

जयंत चौधरी ने आगरा और आसपास के क्षेत्रों में आलू की खेती का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के किसानों की मांग आलू बोर्ड बनाने की है. उन्होंने बताया कि आलू किसानों से मुलाकात के दौरान इस तरह के बोर्ड की जरूरत का मुद्दा सामने आया था और उन्होंने किसानों की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाई है.

उन्होंने बिहार में मखाना बोर्ड बनाए जाने का उदाहरण दिया. उनके मुताबिक, मखाना बोर्ड बनने के बाद मखाने के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिल रहा है. इसी तरह आलू बोर्ड बनने से आलू और उससे तैयार उत्पादों को प्रोत्साहन मिल सकता है, जिससे किसानों को लाभ होने की उम्मीद है.

जयंत चौधरी ने कहा कि आगरा में आलू अनुसंधान के लिए विश्वस्तरीय इकाई स्थापित होने जा रही है. उन्होंने आलू आधारित खेती और उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया.

खेती और रोजगार पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने खेती-किसानी के साथ तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसरों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब वह मथुरा से सांसद थे, तब किसी ने उन्हें आईटीआई जाने से नहीं रोका था. उनके अनुसार, खेती की तरह आईटीआई से जुड़ा कौशल भी आजीविका का साधन है.

उन्होंने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन संगठन निर्माण और कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. महाराष्ट्र से आगरा पहुंचे रालोद कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे खुद को ब्रज क्षेत्र से जुड़ा हुआ मानते हैं.