कुंदन कुमार, पटना। जदयू के प्रदेश कार्यालय पटना में आज शुक्रवार (9, अक्टूबर) को ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस संवाद में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए हैं।
जदयू नेताओं का कहना है कि संधि में बिहार के हितों की अनदेखी की गई है। इसमें उस प्रावधान को हटाने की मांग की गई है, जिसके तहत बिहार को लीन सीजन (कम पानी के समय) में गंगा का पानी छोड़ना पड़ता है, ताकि इस पानी का इस्तेमाल बिहार में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक विकास के लिए किया जा सके।
‘फरक्का जलसंधि से बिहार को हो रहा घाटा’
बैठक के बाद जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, फरक्का जलसंधि का नवीकरण नहीं हो इसको लेकर हम लगातार अपना मांग जारी रखेंगे। क्योंकि इस जलसंधि से बिहार को काफी घाटा हो रहा है, जो हम लोगों ने केंद्र सरकार को भी बता दिया है। उन्होंने कहा कि, बिहार में बाढ़ और सुखाड़ कि स्थिति जो बन रही है, ये उसी कारण से हो रहा है। अगर इसका नवीकरण हो तो पहले इसके उपाय किए जाए।
‘नीतीश की सोच के साथ चल रही पार्टी’
वहीं, एक सवाल के जवाने उमेश कुशवाहा ने कहा कि, हमारी पार्टी लगातार नीतीश कुमार की सोच के साथ ही चल रही है और उन्हीं के सोच के अनुसार उन्हीं के द्वारा किए गए कार्यों को लेकर कहीं ना कहीं कार्यक्रम का आयोजन आगे भी होते रहेगा। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, एनडीए के बीच जो कुछ है। सब दिख रहा है। आज विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री आवास में बुलाई गई हैं। साथ ही उन्होंने एमएलसी की सभी 8 सीटों पर चुनाव जीतने की बात कही।
फरक्का जल संधि पर लगना चाहिए विराम
वहीं, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने नीतीश संवाद कार्यक्रम के बाद कहा कि, फरक्का जलसंधि से बिहार को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि, निश्चित तौर पर अब इस पर विचार करना चाहिए। इसको लेकर हम लोग लगातार केंद्र सरकार से भी रिक्वेस्ट कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी हमने बात की थी कहीं ना कहीं फरक्का जल संधि पर विराम लगना चाहिए।
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