पटना। ​जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है, जिसमें सत्ता के समीकरणों को साधने की कोशिश साफ दिख रही है। इस नई सूची में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम संगठन के किसी भी पद के लिए शामिल नहीं किया गया है। हालांकि निशांत सक्रिय राजनीति में कदम रख चुके हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें फिलहाल आधिकारिक पद से दूर रखा है।

​संजय झा फिर बने कार्यकारी अध्यक्ष

​पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने एक बार फिर संजय झा पर भरोसा जताया है। उन्हें पुनः राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संजय झा को नीतीश कुमार का बेहद करीबी और पार्टी के भीतर एक कुशल रणनीतिकार माना जाता है। उनके दोबारा चयन से यह स्पष्ट है कि आगामी चुनावों और सांगठनिक विस्तार में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।

​उपाध्यक्षों की संख्या में कटौती और डिमोशन

​पार्टी ने इस बार राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की संख्या में भारी कटौती की है। पहले जहां तीन उपाध्यक्ष थे, अब केवल पूर्व सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को ही इस पद की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, पूर्व उपाध्यक्ष मनीष रंजन और श्याम रजक के लिए यह लिस्ट झटके वाली रही; दोनों को डिमोट कर अब राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। इसके अलावा, भगवान सिंह कुशवाहा को हटाकर रमेश सिंह कुशवाहा को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। चर्चा है कि भगवान सिंह कुशवाहा को जल्द ही कैबिनेट में मंत्री पद मिल सकता है।

​3 मई से जन-संवाद पर निकलेंगे निशांत

​भले ही संगठन में निशांत को पद न मिला हो, लेकिन वे जमीन पर उतरने को तैयार हैं। आगामी 3 मई से निशांत कुमार बिहार यात्रा की शुरुआत करेंगे। पश्चिमी चंपारण से शुरू होने वाली यह यात्रा राज्य के सभी 38 जिलों तक पहुंचेगी। इस दौरान वे सीधे जनता से संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को समझेंगे। राजनीतिक गलियारों में इस यात्रा को उनके औपचारिक राजनीतिक सफर की ‘लॉन्चिंग’ के रूप में देखा जा रहा है।

​विपक्ष पर निशाना: कानून व्यवस्था का दिया हवाला

​पार्टी जॉइन करने के बाद निशांत आक्रामक तेवर में नजर आ रहे हैं। हाल ही में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने 2005 से पहले की सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार में भय और सांप्रदायिक दंगों का बोलबाला था, जिसे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने बदला। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार का श्रेय अपने पिता के शासन को दिया।