जीवन सूक्त : आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः। छांदोग्य उपनिषद् के इस श्लोक का अर्थ है आहार की शुद्धता से मन और अंतःकरण की शुद्धता में सहायता मिलती है। सात्त्विक एवं संतुलित भोजन सकारात्मक जीवनशैली का आधार बन सकता है।

वैश्विक तल पर भी शाकाहार को भरपूर समर्थन मिलता रहा है। विश्व शाकाहारी दिवस की स्थापना 1977 में नॉर्थ अमेरिकन वेजिटेरियन सोसाइटी ने की थी और 1978 में अंतरराष्ट्रीय शाकाहारी संघ ने इसे समर्थन दिया। इस सात्विक दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य, पर्यावरण, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

“Prevention is better than cure.” इस प्रचलित पंक्ति का कथन शत प्रतिशत सत्य है कि बीमारी का उपचार करने से बेहतर है स्वस्थ आदतों को अपना कर बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है। भोजन की एक शानदार पद्धति होने के साथ ही शाकाहार, स्वस्थ जीवन और संवेदनशील विचारों को अपनाने का संकल्प भी है। फल, दालें, सब्जियाँ, साबुत अनाज, मेवे और बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। संतुलित शाकाहारी भोजन हृदय स्वास्थ्य, रक्तचाप, वज़न और पाचन को बेहतर बनाए रखने वाला होता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों के लिए विविध शाकाहार आहार लिया जा सकता है।

परहित बस जिन्ह के मन माहीं।
तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं॥

इस चौपाई का अर्थ भी यही है कि जिनके मन में सदैव दूसरों का हित करने की भावना रहती है उनके लिए संसार में कुछ भी कठिन नहीं है। शाकाहार के माध्यम से मानुष करुणा, प्रकृति के प्रति सम्मान और जीवों के प्रति अपनी संवेदना प्रामाणिकता के साथ प्रकट कर सकता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से भी शाकाहार करुणा, अहिंसा, संयम और सह-अस्तित्व की भावना को प्रोत्साहित करने वाला होता है। “अहिंसा परमो धर्मः” के संदेश को आधार बनाकर चलने वाली भारतीय संस्कृति में भी हमें प्रत्येक जीव के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा देती है। हमारे भोजन की थाली से भी हमारे मन की करुणा का भाव उजागर होता है। हमारे भोज्य सामग्री के चयन में भी विनम्रता और उदारता का प्रदर्शन होता है।

“A sound mind in a sound body.” इस कहावत के अनुसार स्वस्थ शरीर मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन का आधार है।जिम और शरीर सौष्ठव के शौक़ीन आज के युवाओं के लिए भी शाकाहार एक सकारात्मक जीवनशैली का विकल्प है। चना, दाल, राजमा, सोया, दूध और मेवों जैसे स्रोतों से शरीर को आवश्यक पोषण मिल सकता है।

“You are what you eat.” जैसा भोजन, वैसा शरीर और जैसा शरीर वैसा ही जीवन पर प्रभाव। स्वाद के साथ स्वास्थ्य, भोजन के साथ संवेदना और जीवन के साथ प्रकृति के संतुलन को भी महत्व देते हुए पूर्णतः वीगन आहार लेने वालों को विटामिन B12 के विश्वसनीय स्रोत पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि सच्ची प्रगति वही है, जिसमें मनुष्य स्वस्थ रहे और उसकी मानवता भी जीवित रहे। शाकाहार महज़ खान-पान नही वरन स्वास्थ्य, संयम, करुणा और प्रकृति के प्रति हमारी ज़िम्मेवारी भी है।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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