“United we stand, divided we fall.”
“Alone we can do so little; together we can do so much.” इस अंग्रेज़ी proverb का अर्थ है अकेले हम बहुत थोड़ा कर पाते हैं लेकिन मिलकर और एकजुट होकर बहुत कुछ किया जा सकता है। गुजरात में बारडोली सत्याग्रह की सफलता ने वल्लभ भाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि दिलाई थी। उनकी विरासत का प्रतीक 182 मीटर ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ आज भी देश को एकजुटता की शक्ति का संदेश दे रही है। सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन, विश्व के युवाओं के लिए एक प्रेरणापुंज है। जिन्होंने इस सत्य को स्थापित किया है कि व्यक्तिगत उपलब्धियों, ऊंचे पद या आर्थिक समृद्धि के अलावा असली सफलता वह है जिससे समाज और राष्ट्र का कल्याण हो। भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और स्मृति को समर्पित राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर भारत की एकता, अखंडता और सामूहिक शक्ति का उत्सव है। वर्ष 2014 से शुरू हुई इस परंपरा का मूल उद्देश्य देशवासियों में राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
आज़ादी के समय भारत सैकड़ों देसी रियासतों में बंटा हुआ था।ऐसी विषम परिस्थितियों में सरदार पटेल ने अपनी अद्भुत दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल कूटनीति से 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाकर यह सिद्ध कर दिया कि जब नेतृत्व में संकल्प और उद्देश्य में राष्ट्रहित हो, तो असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड की यह चौपाई युवाओं को उनके दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और कर्मशीलता की शक्ति का भान कराने के लिए भी उपयुक्त जान पड़ती ही जिसमें कहा गया है- संसार में ऐसा कौन-सा कठिन कार्य है जिसे तुम पूरा नहीं कर सकते? “Unity is strength.” का सामन्य अर्थ है एकता में ही सबसे बड़ी शक्ति है। देश के युवाओं को जाति, भाषा, क्षेत्र और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए इस प्रयास में मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए, प्रतिस्पर्धा हो सकती है लेकिन वैमनस्य नहीं होना चाहिए।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेना और एकता की शपथ लेना तभी सार्थक है जब अपने व्यवहार में भी एकता को अपनाते हुए प्रत्येक युवा संकल्प लें कि अपनी प्रतिभा, परिश्रम और चरित्र से राष्ट्र को मजबूत बनाएंगे। “Coming together is a beginning; keeping together is progress; working together is success.” अर्थ: साथ आना शुरुआत है, साथ बने रहना प्रगति है और मिलकर काम करना सफलता है।
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते॥
संस्कृत के इस सुभाषित अर्थ है हम सब साथ चलें, मिलकर संवाद करें और हमारे मन एक-दूसरे के साथ सामंजस्य स्थापित करें। यह मंत्र सामूहिकता और एकजुटता की प्रेरणा देता है। अर्थात् एकजुट युवा ही विकसित, समरस और श्रेष्ठ भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
एकेनापि सुवृक्षेण पुष्पितेन सुगन्धिना। वासितं तद्वनं सर्वं सुपुत्रेण कुलं यथा॥
भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व को सुशोभित करने वाली संस्कृत के इस सुभाषित का आशय है जिस प्रकार एक सुंदर, सुगंधित और पुष्पित वृक्ष पूरे वन को सुगंधित कर देता है उसी प्रकार एक योग्य व्यक्ति अपने पूरे परिवार, समाज और देश का गौरव बढ़ा सकता है।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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