चिंता करना ज़िम्मेदारी उठाना नहीं है बल्कि समझदारी से उनका समाधान निकालना ही सही मायनों में ज़िम्मेदारी निभाना है। “A calm mind brings inner strength and self-confidence.” अर्थ: शांत मन आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। सोचकर बताइए चिंतित होकर आज तक किसने अपनी किसी समस्या का समाधान पाया है? जीवन में अमूमन सभी ने अनगिनत रातें चिंता में गुजारीं होंगी, कितने दिन अनजान डर में बिताए होंगे लेकिन क्या इससे किसी की समस्याएं कम हुईं? अनुभव यही कहता है चिंता समाधान देने की जगह हमारी मानसिक शांति छीन लेती है। तनाव से सिर्फ़ बुद्धि उलझती है और रास्ते दिखाई देना बंद हो जाते हैं। इसके विपरीत, जब मन शांत और सहज होता है तब कठिन परिस्थितियों में भी समाधान की राह नजर आने लगती है।
प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते। प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते॥
श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक का अर्थ है मन की प्रसन्नता से दुखों का प्रभाव कम होता है और शांत चित्त व्यक्ति की बुद्धि स्थिर हो जाती है। चिंतातुर बने रह कर हमने अपना जीवन महा-गंभीर बना लिया है, उदाहरण के तौर पर किसी के कटु शब्द हमें महीनों तक दुखी रख सकते हैं, सड़क पर किसी का हम से आगे निकल जाना हमारे अहंकार को चोट पहुंचा सकता है। अब जरा सोचिए, क्या इतनी छोटी घटनाओं के लिए अपने जीवन की अनमोल खुशियाँ खो देना उचित है? “Keep calm and carry on.” अर्थ: शांत रहिए और अपने कर्तव्य-पथ पर आगे बढ़ते रहिए।
धरातल की कठोर सच्चाई यह है कि जीवन सुख-दुख, सफलता-असफलता और मिलन-बिछोह का एक रंगमंच है। यहाँ हर घटना सीखने के लिए है, हर गलती सुधारी जाने के लिए है और हर विपरीत परिस्थिति साहस के साथ सामना करने के लिए है। “Life is too short to worry about little things.” अर्थ: छोटी-छोटी बातों की चिंता में उलझने के लिए जीवन बहुत छोटा है। जीवन की किसी घटना को अपने मन पर इतना हावी मत होने दीजिए कि जीने का आनंद ही समाप्त हो जाए।
जिस तरह बच्चे छोटी-छोटी चीजों में खुशियाँ इसलिए खोज लेते हैं क्योंकि वे बीते कल का बोझ और आने वाले कल की चिंता लेकर नहीं चलते। इन्हीं बच्चों के बड़े होने पर हम उन्हें जिम्मेदारियाँ तो सिखाते हैं लेकिन कई बार सहजता से जीना भूल जाते हैं। स्वयं को और आने वाली पीढ़ियों को तनाव की ग़ुलामी मुक्त जिम्मेदार बनाइए।
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते॥
विषय से ‘संबंधित’ श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक का अर्थ है- जो व्यक्ति सुख और दुख में संतुलित रहता है, वह जीवन की कठिनाइयों से विचलित नहीं होता। समस्याओं पर विचार कीजिए, समाधान के लिए कर्म कीजिए और शेष समय मुस्कुराकर बिताइए। जिंदगी बार-बार नहीं मिलती। चिंता में इसे बिताने के बजाय प्रेम, प्रसन्नता और सकारात्मकता के साथ जीना सीखिए। “Worrying does not take away tomorrow’s troubles; it takes away today’s peace.” अर्थ: चिंता कल की परेशानियाँ नहीं मिटाती, बल्कि आज का सुकून छीन लेती है।
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि। बंदउं सबके पद कमल सदा जोरि जुग पानि॥
भावार्थ: समस्त संसार में प्रभु का अंश देखने से मन में विनम्रता, प्रेम और स्वीकार का भाव विकसित होता है। इससे छोटी-छोटी बातों पर व्यर्थ की नाराजगी कम हो सकती है। चिंता समस्या का समाधान नहीं है। विवेक से विचार, साहस से कर्म, धैर्य से प्रतीक्षा और प्रसन्नता से जीवन जीना ही वास्तविक समझदारी है। चिंता कम कीजिए, प्रयास बढ़ाइए और जीवन को मुस्कुराकर जीना सीखिए।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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