जीवन में विरोधी का होना हमेशा बाधा नहीं होता विवेकपूर्ण दृष्टि रखी जाए तो कई बार हमारे प्रतिद्वंद्वी हमारी क्षमता, सजगता और आत्मविश्वास को बढ़ाकर श्रेष्ठ पथ-प्रदर्शक बन सकते हैं. विरोध हमें अपनी कमियों को पहचानने, स्वयं को सुधारने और लक्ष्य के प्रति अधिक गंभीर होने का अवसर तो देते ही हैं साथ ही आपको देख कर उनकी खीज, उनका क्रोध और उनका नैराश्य आपको संकेत देता है कि आपने सही मार्ग का चुनाव किया है.
जीवन का यह अटल सत्य है कि आसान रास्ते पर चलकर अनुभव सीमित रह सकता है लेकिन चुनौतियों से गुजरकर व्यक्तित्व मजबूत बनता है. इसीलिए कहा भी गया है कि “A smooth sea never made a skilled sailor.” अर्थात् एक शांत समुद्र कभी कुशल नाविक नहीं बनाता. जीवन की कठिन लहरें ही हमें संघर्ष करना और आगे बढ़ना सिखा सकती हैं.
प्रतिद्वंद्वी हमारी कमजोरियों को उजागर करने की कोशिश करता है इसके साथ ही उसकी सफलता हमें अपनी तैयारी को बेहतर करने की प्रेरणा देती है. विरोधियों की आलोचना आत्ममंथन का एक बेहतरीन अवसर है. एक अँग्रेज़ी कहावत है “Competition brings out the best in people.” स्वस्थ प्रतिस्पर्धा व्यक्ति की श्रेष्ठ क्षमता को निखारती है. “Iron sharpens iron” यानी लोहा ही लोहे की धार तेज़ कर सकता है इसका यह भी अर्थ बनता है कि मजबूत प्रतिस्पर्धा दोनों पक्षों को बेहतर बनाती है.
विरोधियों से मुक्ति का अर्थ केवल कुछ व्यक्तियों को जीवन से हटाना नहीं बल्कि उसके प्रति अनावश्यक द्वेष और भय से मुक्त होना भी है. “Keep your friends close, but your enemies closer.” अपने मार्ग का सही-सही आँकलन करने के लिए विरोधियों को समीप रखकर उनकी प्रतिक्रियाओं को पर दृष्टि जमाए रखना परम आवश्यक है. प्रतिरोध को सीख में बदलते ही विरोधी हमारी प्रगति का कारण बन जाता है. चुनौतियों को अवसर और प्रतिस्पर्धा को आत्मविकास का माध्यम बनाए इससे ही जीवन की गति भी बढ़ती है और सफलता का मार्ग भी अधिक स्पष्ट होता है.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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