“Every action has a consequence.” विधाता ने ऐसा कोई कर्म ही नही बनाया जिसका कोई परिणाम न हो। न्यूटन की गति का तीसरा नियम (Newton’s Third Law of Motion) ”प्रत्येक क्रिया के बराबर, और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।” कुछ फ़र्क़ के साथ जीवन में भी कारगर होता है। फ़र्क़ यह है कि जीवन में क्रिया की प्रतिक्रिया बराबर मिले इस पर संशय है। सत्कर्म हो या दुष्कर्म कर्मफल अक्सर बढ़ कर ही मिलता है। मानव जीवन उसके कर्मों का प्रतिबिंब है। हम आज जिस स्थिति और परिस्थिति में स्वयं को खड़ा पाते हैं उसके पीछे हमारे बीते हुए कर्मों, सही या ग़लत निर्णयों की कोई न कोई भूमिका अवश्य होती है। सुख- दुख, सफलता-असफलता, सम्मान- उपेक्षा हर अनुभव हमें यह समझने का अवसर देता है कि हमारे कर्म ही हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं।
अपनी कठिन परिस्थितियों के लिए परिस्थितियों, भाग्य, समय या किसी अन्य कारण को दोष देने वाला यदि थोड़ी देर रुककर ईमानदारी से आत्मचिंतन करे तो उसे अपने प्रश्नों के उत्तर अपने भीतर ही मिल सकते हैं।
As you sow, so shall you reap. इसी बात के लिए संस्कृत सुभाषित है यादृशं वपते बीजं तादृशं फलमश्नुते। इन दोनो का आश्य है जैसा बीज बोया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है। अपनी करनी को स्वीकार करना सभी के लिए कठिन होता है लेकिन यही आत्मबोध, आत्म सुधार की पहली सीढ़ी होती है।
सच्चाई यह है कि भाग्य और किस्मत दोनों ही कर्म के दास होते हैं । कर्म जो हमारे वर्तमान को गढ़ता है और भविष्य की दिशा निर्धारित करता है। कोई भी कर्म ऐसा नहीं है जिसका कोई प्रभाव न होता हो। न्यूटन की गति का एक सिद्धांत और भी है जो जीवन के कर्म पर लागू नही होता वह है जीवन के कर्म का परिणाम कब, किस रूप में और कितने समय बाद सामने आएगा यह कोई नही बता सकता लेकिन कर्म का प्रभाव जीवन पर पड़ता अवश्य है। परिस्थिति को कोसने के बजाय अपने कर्मों को देखना चाहिए क्योंकि What goes around comes around. जैसा व्यवहार करते हैं वैसा ही किसी न किसी रूप में वापस मिलता है।
अच्छे विचार, सही आचरण, ईमानदारी, परिश्रम और परोपकार से किए गए कर्म जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं वहीं स्वार्थ, छल, अहंकार और गलत आचरण कठिनाइयों का कारण बनते हैं। न हि कल्याणकृत्कश्चिद् दुर्गतिं तात गच्छति॥ श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक के आधार पर जीवन का सरल सत्य यही है कि कल्याणकारी कर्म करने वाला कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।स्मरण यही रखना है कि कर्म हमारे हाथ में है परिणाम समय के इसलिए परिणाम की चिंता से अधिक अपने कर्म की शुद्धता पर ध्यान दीजिए।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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