जीवन सूक्त : एक बड़ी कला है—संसार को अपनी योजनाएँ बताने से पहले स्वयं को उस योग्य बनाने की, मगर इसका मज़ाहिया स्वरूप यह है कि बहुत से लोग अपने सपनों की घोषणा तो कर देते हैं लेकिन उसे पूरा करने के लिए आवश्यक धैर्य, अनुशासन और परिश्रम नहीं जुटा पाते। स्मरण रहे सिर्फ़ घोषणाओं से नहीं, निरंतर प्रयासों से व्यक्तित्व और पहचान बनती है।
मनुष्य चाहता है कि लोग उसकी प्रशंसा करें, उसे महत्त्व दें और उसके सफलता की चर्चा करें । लेकिन सम्मान माँगने से नहीं, अपने कर्मों और चरित्र से अर्जित होता है। दूसरों को प्रभावित करने से पहले स्वयं को प्रेरित करना आवश्यक है। चेहरे से अधिक चरित्र, शब्दों से अधिक विचार और दिखावे से अधिक व्यवहार को निखारना होता है।
कर्म प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥
श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड की इस चौपाई का संदेश है कि संसार में कर्म ही प्रधान है। जैसा कर्म वैसा ही फल मिलता है।
Every master was once a beginner यानी प्रत्येक कुशल व्यक्ति कभी न कभी शुरुआती अवस्था में भी रहा होगा। जिस तरह बीज मिट्टी के भीतर चुपचाप संघर्ष करता है, अंधकार सहता है और धीरे-धीरे वृक्ष बनता है। बीज के क्रमिक विकास में न तालियाँ बजती हैं न प्रशंसा होती है फिर भी एक दिन वही वृक्ष अपनी छाया और फलों से संसार को लाभ पहुँचाता है। Little by little, one travels far… विषय से प्रासंगिक इस अंग्रेज़ी कहावत का अर्थ है छोटे-छोटे निरंतर प्रयास मनुष्य को बहुत दूर तक ले जाते हैं।
दूसरों की चमक देखकर अपनी यात्रा को छोटा मत समझिए। प्रत्येक व्यक्ति का समय, संघर्ष और लक्ष्य अलग होता है। आज का छोटा प्रयास ही कल की बड़ी उपलब्धि का आधार बनता है। Great oaks from little acorns grow… विषय की इस शीर्षक पंक्ति का आशय है छोटी शुरुआत से भी महान उपलब्धियों का जन्म होता है। दुनिया सफलता देखती है और भविष्य प्रतिदिन का अभ्यास देखता है।
If you want something done right, do it yourself… अर्थात् किसी काम को सही ढंग से करना चाहते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं उठाइए। इसलिए शोर कम कीजिए, आत्मचिंतन अधिक। शिकायतें छोड़िए, स्वयं को सुधारिए और प्रशंसा की प्रतीक्षा करने के बजाय अपने कर्तव्य में जुटे रहिए। आपकी असली पहचान वह तो कदापि नहीं है जो आप दुनिया को दिखाते हैं बल्कि वह है जो आप अकेले में होते हैं।
सफलता बताने का काम शब्दों का नहीं आपके निखरे हुए व्यक्तित्व का होना चाहिए। क्योंकि जब आपका चरित्र, आपका कर्म और आपकी योग्यता बोलने लगेंगे तब संसार को आपके परिचय की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उम्मीद है आपका आज का दिन भी आत्मनिर्माण, सकारात्मक विचारों और श्रेष्ठ कर्मों से परिपूर्ण होगा।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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