रांची/नई दिल्ली। राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, पूसा, नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए।
मंत्री ने झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र की कृषि योजनाओं में राज्य के लिए आवश्यक नीतिगत लचीलापन और विशेष सहयोग की मांग रखी। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र के विस्तार को लेकर झारखंड की पहल का भी उल्लेख किया गया।
राइस फॉलो क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की मांग
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड में रबी के दौरान करीब 12 लाख हेक्टेयर भूमि राइस फॉलो क्षेत्र के रूप में उपलब्ध रहती है। इसमें से करीब 5 से 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के तहत लाने की क्षमता है।
उन्होंने इस क्षेत्र के बेहतर उपयोग के लिए केंद्र से बड़े पैमाने पर वित्तीय और तकनीकी सहायता वाला विशेष पैकेज देने का आग्रह किया।
50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि विकसित करने का प्रस्ताव
कृषि मंत्री ने राज्य में दलहन और तिलहन की खेती के विस्तार की जानकारी देते हुए आगामी रबी सीजन में राइस फॉलो क्षेत्रों की 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के तहत विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने देवघर और दुमका में 1,000-1,000 हेक्टेयर के अरहर क्लस्टरों का उदाहरण देते हुए इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने की बात कही।
पलांडू फार्म को राष्ट्रीय शोध संस्थान का दर्जा देने की मांग
मंत्री ने रांची के पलांडू स्थित फार्म रिसर्च सेंटर को नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हॉर्टिकल्चर एंड ट्राइबल फार्मिंग रिसर्च के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी केंद्र के समक्ष रखा।
उन्होंने इसके लिए आधुनिक आधारभूत संरचना, शोध सुविधाएं और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि बागवानी और जनजातीय कृषि पद्धतियों पर उच्चस्तरीय शोध को बढ़ावा मिल सके।
छोटे किसानों के लिए 90% सब्सिडी की मांग
झारखंड में बड़ी संख्या में छोटे, सीमांत और आदिवासी किसान होने का उल्लेख करते हुए कृषि मंत्री ने सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) के तहत कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बढ़ाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि राज्य जैसे क्षेत्रों में कृषि यंत्रों की लागत छोटे किसानों की क्षमता से अधिक है। ऐसे में उपकरणों पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलने से छोटे किसानों को मशीनीकरण का लाभ मिल सकेगा।
किसान आईडी की अनिवार्यता में छूट की मांग
मंत्री ने AgriStack के तहत किसान आईडी बनाने में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड में पुराने भूमि रिकॉर्ड और मौजूदा जमीनी स्थिति में अंतर होने के कारण किसान आईडी निर्माण की प्रक्रिया में कई व्यावहारिक समस्याएं आ रही हैं।
उन्होंने मांग की कि जब तक राज्य में बड़े पैमाने पर किसान आईडी का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक इसे PM-KISAN समेत अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य शर्त न बनाया जाए और आवश्यक छूट दी जाए।
KCC की धीमी प्रगति पर जताई चिंता
कृषि मंत्री ने झारखंड में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) कवरेज की धीमी प्रगति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने केंद्र से बैंकों को सभी पात्र किसानों को KCC से जोड़ने के लिए समयबद्ध सैचुरेशन अभियान चलाने का निर्देश देने का आग्रह किया।उनका कहना था कि इससे किसानों को संस्थागत और सुलभ कृषि ऋण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय पर जोर
सम्मेलन में शिल्पी नेहा तिर्की ने झारखंड की कृषि जरूरतों के अनुरूप केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को झारखंड आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में रबी सीजन की तैयारियों, फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि, किसान रजिस्ट्री, दलहन-तिलहन और कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।


