रांची। झारखंड में चिकित्सकों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। राज्य के सरकारी और निजी चिकित्सकों ने मंगलवार से चरणबद्ध आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। इसके तहत डॉक्टर काली पट्टी बांधकर मरीजों का इलाज करते हुए विरोध जता रहे हैं। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी सांकेतिक विरोध किया जाएगा और 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार शुरू किया जा सकता है। ऐसे में आंदोलन बढ़ने पर त्योहारों के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

काली पट्टी बांधकर कर रहे मरीजों का इलाज

राज्य के करीब 20 हजार चिकित्सक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के पहले चरण में डॉक्टरों ने आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया था। इसके जरिए मरीजों और उनके परिजनों को आंदोलन के कारणों और लंबित मांगों की जानकारी दी गई।

अब दूसरे चरण में चिकित्सक काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे मरीजों का उपचार जारी रखते हुए अपनी मांगों के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

DACP सहित कई मांगों पर अड़े चिकित्सक

चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार और बिहार की तर्ज पर डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) का लाभ देना शामिल है। डॉक्टरों का कहना है कि सेवा अवधि के आधार पर उन्हें करियर में आर्थिक लाभ और पदोन्नति के बेहतर अवसर मिलने चाहिए।इसके अलावा चिकित्सक रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति और संविदा नियुक्ति नियमावली में संशोधन की मांग भी कर रहे हैं।

मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग

चिकित्सकों ने अपनी सुरक्षा को लेकर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही चिकित्सक नियुक्ति नियमावली में निर्धारित कुछ शर्तों और 13 दुर्गम जिलों में कार्य करने की अनिवार्यता से जुड़ी चौथे DACP की शर्त को समाप्त करने की मांग भी शामिल है।

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में राहत चाहते हैं डॉक्टर

चिकित्सकों की मांगों में 62 वर्ष से अधिक उम्र के डॉक्टरों को प्रशासनिक पदों पर नियुक्त करने की व्यवस्था की समीक्षा करना भी शामिल है। इसके अलावा क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत 50 बेड वाले अस्पतालों के लिए पंजीकरण की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के साथ वार्ता, लेकिन समाधान का इंतजार

आंदोलन के बीच सोमवार को चिकित्सकों की स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के साथ वार्ता हुई। बातचीत में सकारात्मक पहल के संकेत मिले, लेकिन अब तक कोई ऐसा ठोस निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे आंदोलन समाप्त होने की स्थिति बन सके। इसी वजह से चिकित्सकों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दूसरे चरण का विरोध शुरू कर दिया है।

21 अक्टूबर को सांकेतिक विरोध, 22 से कार्य बहिष्कार की चेतावनी

चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं होने पर 21 अक्टूबर को राज्यभर में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

यदि आंदोलन कार्य बहिष्कार तक पहुंचता है, तो अस्पतालों में मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में चिकित्सकों की मांगों पर सहमति बनाना स्वास्थ्य विभाग के लिए अहम चुनौती होगी।