रांची। झारखंड में परीक्षा घोटाले की जांच के दौरान सीआईडी ने एक संगठित सिंडिकेट के काम करने के तरीके का खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षाओं के संचालन से लेकर साक्षात्कार तक अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए फोन कॉल, कोडिंग और डिकोडिंग का सहारा लिया जाता था। तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के विश्लेषण में बिचौलियों, अधिकारियों और संबंधित लोगों के बीच कथित सांठगांठ के संकेत मिले हैं।
इंटरव्यू से पहले होती थी कोडिंग-डिकोडिंग, पसंदीदा बोर्ड में भेजे जाते थे अभ्यर्थी
जांच के मुताबिक, साक्षात्कार में मनमाफिक अंक दिलाने के लिए दलालों और एजेंटों के माध्यम से अभ्यर्थियों के क्रमांक जुटाए जाते थे। इन क्रमांकों को कोड में बदला जाता था। इसके बाद निजी एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक द्वारा कोड सूची तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते को सौंपे जाने की बात सामने आई है।
सीआईडी के अनुसंधान के अनुसार, साक्षात्कार से ठीक एक दिन पहले कोड को डिकोड कराया जाता था। इसके बाद चिन्हित अभ्यर्थियों को कथित तौर पर तत्कालीन अध्यक्ष के बोर्ड या उनके प्रभाव वाले सदस्यों के बोर्ड में आवंटित किया जाता था। जांच एजेंसी को आशंका है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया गया।
सीडीआर से खुली कथित सांठगांठ की पोल, सैकड़ों बार हुई बातचीत
सीआईडी द्वारा जुटाए गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण में तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते और बिचौलियों, अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच लगातार संपर्क होने की बात सामने आई है। जांच में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है।
स्ट्रांग रूम से ओएमआर स्कैनिंग तक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जांच के अनुसार, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा और ओएमआर शीट व उत्तर पुस्तिकाओं की कस्टडी तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक तथा अध्यक्ष के निर्देशन में थी। आरोप है कि ओएमआर स्कैनिंग के दौरान संबंधित एजेंसी के पास करीब दो महीने तक ओएमआर शीट अनधिकृत रूप से रखी गईं।
इतना ही नहीं, इस अवधि में स्ट्रांग रूम और स्कैनिंग क्षेत्रों के सीसीटीवी कैमरे बंद रखे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इससे परीक्षा सामग्री की सुरक्षा और डिजिटल साक्ष्यों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
36 अभ्यर्थियों की ओएमआर कार्बन कॉपी पैसे लेकर देने का मामला भी जांच में
जांच में जेट परीक्षा से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया है। आरोप है कि अभय कुमार की कंपनी द्वारा संचालित इस परीक्षा में धर्मेंद्र कुमार ने 36 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट की कार्बन प्रतियां पैसे लेकर अरुण को दी थीं। सीआईडी की जांच में इस मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि होने की बात कही गई है।
पूरे मामले में तकनीकी साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और परीक्षा सामग्री की कस्टडी से जुड़े पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के निष्कर्ष परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और इसमें शामिल लोगों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

