रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत दर्ज FIR को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जवाब दाखिल करने के लिए दोबारा अतिरिक्त समय मांगे जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित की है।
ED अधिकारियों ने FIR रद्द करने की मांग की
यह मामला रांची के SC-ST थाने में ED के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने FIR और SC-ST एक्ट के तहत शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया है और इसे रद्द करने की मांग की है। याचिका में कपिल राज, देवव्रत झा समेत अन्य अधिकारियों का नाम शामिल है।
हेमंत सोरेन की शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR
मामले की पृष्ठभूमि में जनवरी 2024 की घटनाएं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हेमंत सोरेन की ओर से ED अधिकारियों के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत शिकायत की गई थी। आरोप लगाया गया था कि अधिकारियों ने उनके अधिकारों का उल्लंघन किया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इसी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई थी।
जवाब के लिए मांगा गया था अतिरिक्त समय
सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा गया। अदालत ने छह सप्ताह का समय देने से इनकार करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। देरी और अतिरिक्त समय की मांग पर कोर्ट ने 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और राशि झालसा में जमा कराने का निर्देश दिया।
2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले में जवाब दाखिल किया जाना है। इसके बाद अदालत FIR और SC-ST एक्ट के तहत शुरू हुई कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर आगे सुनवाई करेगी। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी।

