धनबाद। कोयला कर्मियों के भविष्य निधि (PF) की रकम के निवेश और उससे हुए भारी नुकसान के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने CBI जांच का निर्देश दिया है। मामला Dewan Housing Finance Corporation Limited (DHFL) में Coal Mines Provident Fund Organisation (CMPFO) की ओर से किए गए करीब 1300 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा है। DHFL के वित्तीय संकट में आने के बाद करीब 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान का मामला सामने आया था। अब जांच एजेंसी निवेश के फैसले, कथित चेतावनियों और रकम निकालने में हुई देरी से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करेगी।

Coal Employees Welfare Association, Dhanbad की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया गया। याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने CBI जांच का निर्देश दिया। इससे पहले अदालत ने मामले में संभावित आपराधिक कार्रवाई और अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे।

10 सितंबर को हाईकोर्ट ने उठाए थे गंभीर सवाल

इस मामले में 10 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने CMPFO को हुए बड़े वित्तीय नुकसान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि क्या मामले में FIR दर्ज करने या अन्य आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई प्रस्ताव है।

अदालत ने CMPFO की ओर से दाखिल हलफनामे पर भी आपत्ति जताई थी। सवाल यह था कि जब आंतरिक जांच और विभागीय कार्यवाही पूरी नहीं हुई थी, तब किसी अधिकारी को लगभग दोषमुक्त करने जैसा निष्कर्ष किस आधार पर निकाला गया।

CBI ने हलफनामे में जांच के लिए जताई थी सहमति

Coal Employees Welfare Association, Dhanbad के सचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने 28 सितंबर को अपना हलफनामा दाखिल किया था। इसमें एजेंसी ने कहा था कि अदालत आदेश देती है तो वह मामले की जांच कर सकती है।

इसके बाद 8 अक्टूबर की सुनवाई में हाईकोर्ट ने CBI जांच का निर्देश दिया। अब मामले में निवेश से जुड़े फैसलों और संभावित चूक की जांच का रास्ता खुल गया है।

DHFL में कैसे फंसे कोयला कर्मियों के PF के करोड़ों रुपये?

पूरा मामला CMPFO की ओर से DHFL में किए गए करीब 1300 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि DHFL की वित्तीय स्थिति को लेकर पहले ही चिंता जताई गई थी और निवेश की रकम वापस निकालने की सलाह भी दी गई थी। इसके बावजूद समय रहते रकम नहीं निकाली गई।

याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, CMPFO के फंड मैनेजरों ने जून 2019 में ही DHFL की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। बाद में DHFL के संकट में आने के बाद CMPFO को करीब 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

हालांकि, निवेश संबंधी फैसलों, चेतावनियों पर हुई कार्रवाई और नुकसान के लिए जिम्मेदारी तय करने जैसे पहलुओं की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।

CBI जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे

  • अब जांच में मुख्य रूप से निम्नलिखित पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी:
  • DHFL में निवेश का फैसला किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में लिया गया?
  • निवेश के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं?
  • DHFL की वित्तीय स्थिति को लेकर अधिकारियों को कब-कब जानकारी मिली?
  • फंड मैनेजरों और विशेषज्ञों की चेतावनियों पर क्या कार्रवाई हुई?
  • निवेश की रकम वापस निकालने में देरी क्यों हुई?
  • नुकसान के बाद रकम की वसूली के लिए क्या कदम उठाए गए?
  • क्या पूरे घटनाक्रम में आपराधिक लापरवाही या अन्य किसी अपराध की भूमिका रही?

इन सवालों के जवाब से निवेश प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को समझने में मदद मिल सकती है।

‘कमर्शियल लॉस’ बताने पर भी अदालत ने जताई थी आपत्ति

10 सितंबर के आदेश में हाईकोर्ट ने मामले को केवल व्यावसायिक नुकसान यानी ‘Commercial Loss’ के तौर पर देखने पर सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि जब नुकसान सैकड़ों करोड़ रुपये का हो और विशेषज्ञों की सलाह के बावजूद रकम नहीं निकालने के आरोप हों, तो विभागीय जांच पूरी होने से पहले आपराधिक साजिश या विश्वासघात की संभावना को खारिज करना उचित नहीं होगा।

अदालत की चिंता इस बात को लेकर भी थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी संभावित जिम्मेदारी का निर्धारण पर्याप्त तथ्यों के आधार पर किया जाए।

तत्कालीन CMPFO कमिश्नर को लेकर भी उठे थे सवाल

सुनवाई के दौरान तत्कालीन CMPFO कमिश्नर अनिमेष भारती के खिलाफ 17 मई 2024 को आरोपपत्र या विभागीय ज्ञापन जारी किए जाने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई थी।

हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब विभागीय और आंतरिक जांच पूरी नहीं हुई थी, तब किसी अधिकारी को लगभग दोषमुक्त करने वाला निष्कर्ष कैसे निकाला गया। अदालत ने मामले की जांच की प्रक्रिया और हलफनामे में अपनाए गए रुख पर भी चिंता जताई थी।

कोयला मंत्रालय से भी मांगा गया था जवाब

10 सितंबर के आदेश में हाईकोर्ट ने कोयला मंत्रालय के सचिव, संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार से हलफनामा मांगा था। अदालत ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा था कि मामले में FIR सहित आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई प्रस्ताव है या नहीं।अदालत ने यह भी कहा था कि अधिकारियों को मिले विवेकाधीन अधिकारों का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता।

कोयला कर्मियों के PF की जवाबदेही का मामला

Coal Employees Welfare Association, Dhanbad के सचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला सिर्फ निवेश में हुए नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि कोयला कर्मियों के भविष्य निधि की बड़ी रकम और उसकी जवाबदेही से जुड़ा है।

हाईकोर्ट के CBI जांच के निर्देश के बाद अब निवेश की प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों के फैसलों, चेतावनियों पर हुई कार्रवाई और नुकसान के बाद उठाए गए कदमों की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि करीब 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान के पीछे कौन-से कारण और परिस्थितियां जिम्मेदार थीं।