Jharkhand High Court: गैंगस्टर अखिलेश सिंह (Gangster Akhilesh Singh) को झारखंड हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। 2004 के आर्म्स एक्ट मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने गैंगस्टर अखिलेश सिंह की जमानत को चुनौती दी थी। हालांकि झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए गैंगस्टर अखिलेश सिंह बरी करने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव और बरामदगी स्थल पर आरोपी के नियंत्रण के अभाव को आधार बनाया।

दरअसल जमशेदपुर के कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह को वर्ष 2004 के एक आर्म्स एक्ट मामले में निचली अदालत ने बरी कर दिया था। फैसले को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि सरकार को हाईकोर्ट से भी झटका लगा है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

यह मामला सिदगोड़ा थाना कांड संख्या 86/2004 से जुड़ा है। पुलिस के दावों के अनुसार, 9 अक्टूबर 2004 की रात पूछताछ के दौरान अखिलेश सिंह ने एक क्वार्टर में पिस्तौल और कारतूस छिपाकर रखने की जानकारी दी थी।  इसके आधार पर पुलिस टीम ने देर रात करीब तीन बजे क्वार्टर नंबर 59 में छापेमारी की थी। पुलिस ने ताला तोड़कर कमरे की तलाशी ली थी।  बेडरूम की रैक से प्लास्टिक में लिपटी एक 9 एमएम की पिस्तौल और मैगजीन में 12 कारतूस बरामद करने का दावा किया था। इसके बाद पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

निचली अदालत के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर 

जमशेदपुर के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 12 अगस्त 2021 को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में अखिलेश सिंह को बरी कर दिया था।  इसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और छापेमारी दल में शामिल पांच पुलिसकर्मियों की गवाही भी कराई थी।हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी की कथित स्वीकारोक्ति प्रमाणित नहीं हो सकी। इसके अलावा जिस क्वार्टर से हथियार की बरामदगी दिखाई गई थी। 

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