रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) निर्धारित समय सीमा में आयोजित नहीं किए जाने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत में शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को शो-कॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

अदालत ने सचिव से पूछा है कि हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करने के मामले में उनके खिलाफ अवमानना का आरोप क्यों नहीं तय किया जाए। कोर्ट ने पूर्व में दिए गए निर्देश के बावजूद JTET आयोजित नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है।

सचिव ने कोर्ट में दिया था परीक्षा कराने का आश्वासन

पिछली सुनवाई में विभागीय सचिव स्वयं एकल पीठ के समक्ष उपस्थित हुए थे। उस दौरान उन्होंने JTET परीक्षा आयोजित कराने का आश्वासन दिया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था।

अब अदालत ने सचिव से स्पष्ट करने को कहा है कि कोर्ट के निर्देश और उनके स्वयं दिए गए आश्वासन के बावजूद निर्धारित समय सीमा में परीक्षा क्यों नहीं कराई गई।

31 मार्च 2026 तक परीक्षा कराने का था निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को 31 मार्च 2026 तक JTET आयोजित करने का निर्देश दिया था। लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद परीक्षा आयोजित नहीं होने पर अदालत ने नाराजगी जताई है।

अदालत ने यह भी पूछा है कि आदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

करीब 9 साल से नहीं हुई JTET

झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा लंबे समय से लंबित है। जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब नौ साल से JTET का आयोजन नहीं हुआ है। परीक्षा नहीं होने का सीधा असर शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है।

सहायक आचार्य नियुक्ति पर भी लगाई थी रोक

हाई कोर्ट ने इससे पहले सहायक आचार्य नियुक्ति के शेष रिक्त पदों पर नियुक्ति करने पर भी रोक लगाई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जब तक JTET का आयोजन नहीं हो जाता, तब तक राज्य सरकार शिक्षक नियुक्ति के लिए नया विज्ञापन जारी नहीं करेगी।

अब सचिव को जारी शो-कॉज नोटिस के बाद इस मामले में सरकार की ओर से क्या जवाब दिया जाता है और अदालत आगे क्या आदेश देती है, इस पर JTET अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।