रांची। झारखंड में सरकारी केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मिलने वाले बोनस में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने मौजूदा 84 रुपये प्रति क्विंटल बोनस में 25 रुपये की बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके बाद किसानों को धान बिक्री पर 109 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा। मंगलवार को होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है।

सरकार पर पड़ेगा 43.60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

बोनस बढ़ाने के फैसले से राज्य सरकार के खजाने पर करीब 43.60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। कैबिनेट की बैठक में इसके अलावा करीब तीन दर्जन प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इनमें सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास और नगर विकास विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।

नवंबर में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर हो सकता है फैसला

कैबिनेट बैठक में नवंबर के पहले सप्ताह में झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को लेकर भी निर्णय हो सकता है। इस विशेष सत्र में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में प्रस्ताव पारित कराने की तैयारी की जा रही है।

इसके अलावा झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर भी कैबिनेट में निर्णय होने की संभावना है।

धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य घटाकर 40 लाख क्विंटल किया गया

राज्य में इस बार धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य में भी संशोधन किया गया है। पहले 50 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे अब घटाकर 40 लाख क्विंटल कर दिया गया है।

विभागीय आकलन के अनुसार, केंद्र सरकार के एनएफएसए सेंट्रल पूल के लिए 19.60 लाख क्विंटल और झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के लिए 19,79,412 क्विंटल धान की जरूरत का अनुमान है। इसी के आधार पर अधिप्राप्ति लक्ष्य में संशोधन किया गया है।

किसानों को कितनी मिलेगी कीमत?

सरकारी केंद्रों पर किसानों से धान की खरीद निर्धारित एमएसपी के अनुसार की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक:

सामान्य धान: 2,550 रुपये प्रति क्विंटल

ग्रेड-ए धान: 2,570 रुपये प्रति क्विंटल

बोनस: 109 रुपये प्रति क्विंटल

प्रति एकड़ अधिकतम बिक्री: 16 क्विंटल

एक किसान द्वारा अधिकतम बिक्री: 200 क्विंटल तक

धान बेचने से पहले ई-केवाईसी और जमीन सत्यापन जरूरी

किसानों को धान बिक्री से पहले ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसके साथ जमीन का सत्यापन और ई-केवाईसी भी अनिवार्य होगा। किसान अपने नजदीकी धान अधिप्राप्ति केंद्र पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच धान बेच सकेंगे।

खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों और उनके आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर किसानों को अधिक से अधिक लाभ देने के लिए यह कदम उठाया गया है।