पलामू/जामताड़ा। शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना के बाद अब उन्हें विदाई देने का सिलसिला शुरू हो गया है। झारखंड के पलामू में बुधवार को महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को भावुक विदाई दी। वहीं, जामताड़ा में श्रद्धालुओं ने वर्षों पुरानी परंपरा निभाते हुए मां की प्रतिमा को कंधे पर उठाकर विसर्जन यात्रा निकाली।

पलामू में सिंदूर खेला के बाद मां को दी विदाई

पलामू के बंगीय दुर्गाबाड़ी में दुर्गा पूजा के समापन पर सिंदूर खेला का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद नम आंखों से मां को विदाई दी गई।

बंगीय दुर्गाबाड़ी की दुर्गा पूजा पूरे पलामू प्रमंडल में चर्चित है। सिंदूर खेला में शामिल होने के लिए दूसरे राज्यों से भी महिलाएं पहुंची थीं। गुजरात से आईं हर्षला संगम पहली बार झारखंड के पलामू में दुर्गा पूजा मनाने पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि यहां आकर उन्हें काफी अच्छा लगा और उन्होंने मां दुर्गा से सभी के मंगल की कामना की।

अगले साल फिर आएंगी मां, इसी उम्मीद के साथ विदाई

श्रद्धालु मुनमुन चक्रवर्ती ने कहा कि मां को विदाई देते समय मन भावुक है, लेकिन इस बात की खुशी भी है कि मां अगले वर्ष फिर आएंगी। वहीं, प्रियंका दास गुप्ता ने बताया कि सिंदूर खेला को लेकर महिलाएं हर साल उत्साहित रहती हैं। उन्होंने मां से कई मन्नतें मांगी हैं और अब अगले साल मां के आगमन का इंतजार रहेगा।

पलामू में 690 से अधिक पूजा पंडाल

पलामू जिले में इस बार 690 से अधिक दुर्गा पूजा पंडाल बनाए गए थे। बुधवार शाम से अधिकांश पंडालों में प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई। विसर्जन को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है और जलाशयों के तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी रखी जा रही है।

जामताड़ा में कंधे पर उठाकर मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन

जामताड़ा बाजार दुर्गा मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन भी धूमधाम से किया गया। यहां श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार मां की प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाकर विदाई दी। यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है।

विसर्जन शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ शामिल हुए। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए भी लोगों की भीड़ जुटी। मां दुर्गा के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की कामना की।