जमशेदपुर। झारखंड के जंगलों में मिलने वाला महुआ अब ग्रामीण महिलाओं की कमाई और आत्मनिर्भरता का नया जरिया बनने जा रहा है। राज्य के वन विभाग ने महुआ को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए बड़ी पहल की है। इसके तहत जमशेदपुर के दलमा वन्यजीव अभयारण्य समेत झारखंड के सभी 11 वन्यजीव अभयारण्यों में ‘महुआ कैफे’ खोलने की योजना बनाई गई है। इन कैफे में महुआ से तैयार पारंपरिक और आधुनिक खाद्य उत्पाद पर्यटकों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे स्थानीय महिलाओं और युवतियों को प्रशिक्षण, उत्पाद निर्माण और बिक्री के जरिए रोजगार के अवसर मिलेंगे।
बेतला में सफल मॉडल, अब दलमा की तैयारी
वन विभाग की इस पहल की शुरुआत पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला क्षेत्र में हो चुकी है। यहां स्थानीय महिलाओं और युवतियों को महुआ से अलग-अलग खाद्य उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें बांस से बने आकर्षक कैफे स्टॉल उपलब्ध कराए गए हैं।
विभाग के अनुसार, महिला स्व-सहायता समूह इन कैफे के जरिए अपने उत्पाद बेच रहे हैं और प्रतिदिन चार हजार रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं। बेतला में मिले अनुभव के आधार पर अब इसी मॉडल को दलमा सहित राज्य के दूसरे अभयारण्यों में लागू करने की तैयारी है।

महुआ के लड्डू से लेकर कुकीज और स्पेशल चाय तक
महुआ कैफे में पर्यटकों को महुआ से बने कई तरह के खाद्य उत्पाद मिलेंगे। मेनू में पारंपरिक स्वाद के साथ आधुनिक उत्पादों को भी शामिल किया जाएगा।
प्रस्तावित उत्पादों में शामिल हैं:
- महुआ के लड्डू, टॉफी और हलवा
- महुआ की कुकीज, बिस्कुट और केक
- महुआ की स्पेशल चाय
- महुआ का मीठा सिरप और शरबत
- महुआ का जैम और एनर्जी पाचक
- रागी और महुआ से बनी पौष्टिक रोटी
इस पहल के जरिए महुआ को केवल पारंपरिक वन उपज के रूप में नहीं, बल्कि बाजार में बिकने वाले विभिन्न उत्पादों के रूप में पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।
महुआ संग्रहण से पैकेजिंग और बिक्री तक जुड़ेंगी महिलाएं
महुआ कैफे का उद्देश्य सिर्फ खाद्य उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का पूरा अवसर तैयार करना है। महिलाओं को महुआ संग्रहण, उत्पाद तैयार करने, पैकेजिंग और बिक्री से जोड़ा जाएगा।
इससे स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, जंगलों में उपलब्ध वन संपदा का बेहतर उपयोग करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी काम होगा।
झारखंड के इन 11 अभयारण्यों में खुलेंगे महुआ कैफे
वन विभाग की योजना के तहत जिन अभयारण्यों में महुआ कैफे खोलने की तैयारी है, उनमें शामिल हैं:
- दलमा वन्यजीव अभयारण्य — जमशेदपुर
- हजारीबाग वन्यजीव अभयारण्य — हजारीबाग
- कोडरमा वन्यजीव अभयारण्य — कोडरमा
- लावालौंग वन्यजीव अभयारण्य — चतरा
- महुआडांड़ भेड़िया अभयारण्य — लातेहार
- पलामू वन्यजीव अभयारण्य — पलामू क्षेत्र
- पालकोट वन्यजीव अभयारण्य — गुमला
- पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्य — गिरिडीह
- टोपचांची वन्यजीव अभयारण्य — धनबाद
- उधवा झील पक्षी अभयारण्य — साहिबगंज
- गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य — कोडरमा-गया क्षेत्र
वन विभाग का फोकस: वन संपदा से स्थानीय रोजगार
झारखंड के मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एसआर नटेस के अनुसार, राज्य के जंगलों में महुआ के पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद हैं और हर साल इसका पर्याप्त उत्पादन होता है। लेकिन जागरूकता और संसाधनों की कमी के कारण इसका व्यावसायिक उपयोग सीमित रहा है।
उन्होंने बताया कि बेतला में प्रशिक्षण और कैफे के जरिए शुरू किए गए मॉडल को अब दूसरे अभयारण्यों तक पहुंचाने की योजना है। दलमा में महुआ कैफे की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।
वन विभाग की इस पहल से महुआ को नया बाजार मिलने के साथ स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

