रांची/नई दिल्ली। झारखंड में भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराए गए अरुण कुमार को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी पांच साल की सजा पर रोक लगाते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने 8 अक्टूबर 2026 को मामले में आदेश पारित किया। अदालत ने ध्यान में रखा कि अरुण कुमार करीब एक साल 11 महीने जेल में रह चुके हैं। वहीं, मामले में उनकी अपील झारखंड हाईकोर्ट में अभी लंबित है।
2012 में दर्ज हुआ था भ्रष्टाचार का मामला
मामला झारखंड पीएस केस नंबर 19/2012 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार ने आरोप लगाया था कि तोरपा स्थित कैंप कार्यालय में पेशकार के तौर पर कार्यरत रुद्रानंद मेहता ने जमीन से जुड़े काम के निपटारे के लिए 25 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत के आधार पर 30 अगस्त 2012 को जाल बिछाकर कार्रवाई की गई। इसी दौरान अरुण कुमार के कब्जे से 25 हजार रुपये बरामद किए गए। इसके बाद उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया गया।
रिश्वत की मांग और रकम लेने की भूमिका पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में अभियोजन के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि अरुण कुमार पर रुद्रानंद मेहता से रिश्वत की रकम प्राप्त करने और उसे अपने कब्जे में रखने का आरोप है। ट्रैप टीम ने भी उनके कब्जे से रकम बरामद की थी।
हालांकि, अदालत ने यह भी दर्ज किया कि रिश्वत की मांग रुद्रानंद मेहता की ओर से किए जाने और रकम प्राप्त करने का आरोप भी उन्हीं से जुड़ा था। ऐसे में अरुण कुमार की ओर से रिश्वत मांगने या स्वीकार करने से संबंधित मूल तथ्यों की जांच हाईकोर्ट में लंबित अपील की सुनवाई के दौरान की जानी है।
हाईकोर्ट की अपील लंबित, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सजा पर रोक
निचली अदालत ने अरुण कुमार को दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। हाईकोर्ट के 10 दिसंबर 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए अरुण कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपील की अनुमति दी और उनकी सजा पर रोक लगा दी। साथ ही संबंधित ट्रायल कोर्ट को जमानत की शर्तें तय करने का निर्देश दिया।
दोषसिद्धि पर अंतिम फैसला अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियों से हाईकोर्ट प्रभावित नहीं होगा। हाईकोर्ट मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से आकलन करते हुए कानून के अनुसार अपील का गुण-दोष के आधार पर फैसला करेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अरुण कुमार को राहत मिली है और उनकी पांच साल की सजा पर रोक है। हालांकि, इससे उनकी दोषसिद्धि अंतिम रूप से समाप्त नहीं हुई है। मामले में अंतिम फैसला झारखंड हाईकोर्ट की लंबित अपील पर होना बाकी है।

