रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले का नेमरा गांव अब केवल राजनीतिक और सामाजिक पहचान तक सीमित नहीं रहेगा। दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की स्मृतियों से जुड़े इस गांव को विकास और पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। सरकार की योजना पर काम आगे बढ़ता है तो झारखंड आने वाले पर्यटक नेमरा में झारखंड आंदोलन और महाजनी प्रथा के खिलाफ चले संघर्ष से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को करीब से देख सकेंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के लिए 8 अक्टूबर से अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं। इसी दौरान वे गांव के प्राकृतिक संसाधनों, पहाड़ियों और झरनों वाले इलाकों का अधिकारियों के साथ लगातार जायजा ले रहे हैं।
नेमरा के प्राकृतिक स्थलों को विकसित करने की तैयारी
मुख्यमंत्री की पहल पर नेमरा में विकास की संभावनाओं को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को योजनाओं की जानकारी दी गई है। मुख्य सचिव अविनाश कुमार, नगर विकास एवं पथ विभाग के सचिव सुनील कुमार, पर्यटन सचिव मुकेश कुमार, अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल और वन विभाग के पीसीसीएफ संजीव कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करते हुए विकास की संभावनाओं से अवगत कराया गया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन माता-पिता की स्मृतियों से जुड़े स्थलों के साथ-साथ झारखंड आंदोलन के इतिहास से जुड़े स्थानों को भी विकसित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखना चाहते हैं। इसके तहत नेमरा के पहाड़ी और प्राकृतिक क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे समाज के लोग
रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म में संथाली रीति-रिवाजों का पालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की ओर से 18 अक्टूबर को होने वाले संस्कार भोज के लिए समाज के लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है।
रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आदिवासी समाज के लोग नेमरा पहुंच रहे हैं। कोल्हान और संथाल क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। बुधवार को गिरिडीह के मरांग बुरू संस्थान से जुड़े फागू बेसरा, ग्राम प्रधान और अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और क्षेत्र की स्थिति से उन्हें अवगत कराया।
सातवें दिन राज्यभर से पहुंचे लोग
श्राद्धकर्म के सातवें दिन भी नेमरा में श्रद्धांजलि देने वालों का सिलसिला जारी रहा। मुख्यमंत्री के पैतृक आवास के सामने रूपी सोरेन की तस्वीर लगाई गई है, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो, भुनेश्वर मेहता, घुरन राम, रवींद्र कुमार पांडेय, विधायक प्रदीप यादव, जनार्दन पासवान, मंगल कालिंदी, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की और बन्ना गुप्ता, मेयर सुधा गुप्ता, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान, पूर्व विधायक समरी लाल, अर्पणा सेन गुप्ता और गिरिनाथ सिंह समेत कई लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं फागू बेसरा, भुनेश्वर प्रसाद भुन्नू, मुस्ताक आलम, बिनोद किस्कू और संतोष कुमार संतू सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने भी रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि दी। सीएनआइ के बिशप और पादरियों का प्रतिनिधिमंडल भी मुख्यमंत्री से मिला और शोक संवेदना व्यक्त की।
जरूरतमंदों से भी लगातार मिल रहे मुख्यमंत्री
नेमरा में श्राद्धकर्म के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक आवास पहुंचने वाले जरूरतमंद लोगों से भी मुलाकात कर रहे हैं। बुधवार को उन्होंने कई दिव्यांगजनों को सहायता उपलब्ध कराई।
अलग-अलग गांवों से पहुंचे लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने उनके आवेदन लिए और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को लेकर भी चर्चा जारी रही।

