Jharkhand Police Hi-tech Avatar: आधुनिकता के इस जमाने में, जब क्राइम करने के तरीके बदल गए हैं। अपराधी घर या कहीं और बैठकर हजारों किमी दूर से ही अपराध को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में झारखंड पुलिस भी अपने अधिकारियों को अनुसंधान के वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं से प्रशिक्षित कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसियों अबतक झारखंड पुलिस के 1000 से अधिक एएसआई, दारोगा, इंस्पेक्टर व डीएसपी को प्रशिक्षित कर चुकी है।
आगामी 12 से 16 अक्टूबर तक बेहतर व प्रभावी अनुसंधान पर अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाना है। इसका आयोजन रांची के होटवार स्थित अनुसंधान प्रशिक्षण विद्यालय में ऑफलाइन व ऑनलाइन होने जा रहा है।
यह प्रक्रिया लगातार जारी है। प्रत्येक माह इससे संबंधित कोर्स कराए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विशेषज्ञ अधिकारियों के माध्यम से झारखंड पुलिस के अधिकारियों को ऑनलाइफुल (एक्टिविटिज) एक्ट पर प्रशिक्षण दिलाया गया था।झारखंड के अनुसंधान पदाधिकारियों को इस अधिनियम की बारीकियां समझाई गई थी।
इससे पहले भी झारखंड पुलिस ने अपने अधिकारियों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता व भारतीय साक्ष्य अधिनियम का सूक्ष्म तरीके से प्रयोग की जानकारी दी है और उससे प्रशिक्षित कराया है। झारखंड में आतंकी गतिविधियों, माओवादी गतिविधियों से संबंधित जितने भी मामले दर्ज हुए हैं, उनमें यह अधिनियम जोड़ा गया है। ऐसे में इस अधिनियम के तहत कैसे व किस तरह के सबूतों की आवश्यकता होगी, इससे प्रशिक्षित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि झारखंड में इस अधिनियम के तहत जितने भी मामले दर्ज हैं, उनका गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान किया जा सके।
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