रांची। झारखंड के रेल सुविधा से वंचित इलाकों के लिए नई रेल कनेक्टिविटी का रास्ता खुल रहा है। धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो गई है। दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर मंडल के तहत प्रस्तावित यह ब्रॉडगेज रेल लाइन 291.881 किलोमीटर लंबी होगी। परियोजना का करीब 144.5 किलोमीटर हिस्सा झारखंड में प्रस्तावित है। जून 2026 में रेल मंत्रालय ने इस परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित भी किया था।

सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा को मिलेगा फायदा

प्रस्तावित रेल लाइन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से शुरू होकर जशपुर के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। इससे झारखंड के लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा जैसे क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता खुलेगा। परियोजना पूरी होने पर छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच यात्री तथा माल परिवहन की कनेक्टिविटी मजबूत होने की संभावना है।

बिलासपुर-लोहरदगा की दूरी करीब 79 किमी घटेगी

परियोजना के पूरा होने के बाद बिलासपुर से लोहरदगा के बीच एक वैकल्पिक और छोटा रेल मार्ग उपलब्ध होगा। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, वर्तमान रेल दूरी करीब 543 किलोमीटर है, जो नई लाइन बनने के बाद लगभग 464 किलोमीटर रह जाएगी। यानी दोनों स्थानों के बीच करीब 79 किलोमीटर की दूरी कम हो सकती है। इससे यात्री और माल परिवहन के समय तथा परिचालन लागत में कमी आने की संभावना है।

28 स्टेशन और 79 ROB-RUB का प्रस्ताव

291.881 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रेल मार्ग पर 28 स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इनमें ओरिजिनेटिंग, जंक्शन और हॉल्ट स्टेशन शामिल होंगे। परियोजना में 1 प्रमुख वाटरवे ब्रिज, 16 वायडक्ट, 218 मेजर ब्रिज और 55 माइनर ब्रिज का प्रस्ताव है। इसके अलावा कई सुरंगों के निर्माण की भी योजना है।

सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 79 रोड ओवरब्रिज (ROB) और रोड अंडरब्रिज (RUB) प्रस्तावित किए गए हैं। परियोजना में लेवल क्रॉसिंग की संख्या शून्य रखने का प्रावधान है।

झारखंड में बनेगी करीब 144.5 किमी रेल लाइन

पूरी परियोजना के लिए करीब 2,158.202 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी। इसमें 1,662.587 हेक्टेयर निजी भूमि और 495.615 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹13,162.604 करोड़ बताई गई है। 5 फीसदी मूल्य वृद्धि को शामिल करने पर कुल लागत करीब ₹14,550.53 करोड़ आंकी गई है। झारखंड में करीब 144.5 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण प्रस्तावित है।

खनिज और व्यापार को भी मिलेगा नया रास्ता

नई रेल लाइन से क्षेत्र के खनिज संसाधनों और स्थानीय उत्पादों के परिवहन को बेहतर माध्यम मिलने की संभावना है। परियोजना को बॉक्साइट, कोयला और लौह अयस्क के परिवहन से भी जोड़ा जा रहा है। रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच होगी आसान

रेल नेटवर्क से सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने पर लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापारिक केंद्रों तक पहुंच आसान हो सकती है। परियोजना के निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है।

रेल मंत्रालय ने जून 2026 में इस परियोजना को सार्वजनिक उद्देश्य और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास के लिए Special Railway Project के रूप में अधिसूचित किया था।