JHTET Exam 2026: 1 नवंबर को होने वाली परीक्षा को लेकर मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने सभी जिलों के डीसी को दिए निर्देश, प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट की सुरक्षा के लिए पहली बार विस्तृत एसओपी तैयार।
रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में गड़बड़ी की सीआईडी जांच के बीच झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट)-2026 का निष्पक्ष और पारदर्शी आयोजन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक नवंबर को होने वाली इस परीक्षा में राज्य गठन के बाद अब तक के सबसे अधिक परीक्षार्थियों के शामिल होने की संभावना है। परीक्षा की तैयारियों को लेकर सरकार ने भी कमान संभाल ली है। मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े जरूरी निर्देश दिए हैं।
परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट के सुरक्षित भंडारण से लेकर उनके हस्तांतरण तक की व्यवस्था तय की गई है। जिला स्तर पर इसकी जिम्मेदारी उपायुक्तों को सौंपी गई है। निर्देशों के तहत कोषागार और उपकोषागार में स्ट्रांग रूम बनाने, 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा बलों की तैनाती और अग्निशमन व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा गया है।
986 केंद्रों पर 5.65 लाख परीक्षार्थी होंगे शामिल
जेटेट-2026 के आयोजन के लिए राज्यभर में कुल 986 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिलों को भेजे गए पत्र के अनुसार, इस परीक्षा में कुल 5,65,078 परीक्षार्थी शामिल होंगे। इनमें प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 1 से 5 के लिए 1,95,965 अभ्यर्थी और उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 6 से 8 के लिए 3,69,113 अभ्यर्थी शामिल हैं।
परीक्षार्थियों की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। परीक्षा को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गई हैं।
परीक्षा के हर स्तर पर तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी
जेटेट-2026 के लिए पहली बार विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार किए जाने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य परीक्षा के सुचारु संचालन, गोपनीय सामग्री की सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, परीक्षा से जुड़े पदाधिकारियों के कार्य और जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं, ताकि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से लेकर परीक्षा केंद्रों के संचालन तक किसी स्तर पर लापरवाही न हो।
डीसी को दिए गए प्रमुख निर्देश
1. प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट की सुरक्षा
प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट जैसी गोपनीय सामग्री रखने के लिए कोषागार और उपकोषागार में सुरक्षित स्ट्रांग रूम की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इनके भंडारण और रखरखाव में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
2. स्ट्रांग रूम में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी
गोपनीय परीक्षा सामग्री की सुरक्षा के लिए स्ट्रांग रूम में चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखनी होगी। इसके साथ ही सुरक्षा बलों की तैनाती और अग्निशमन व्यवस्था भी दुरुस्त रखने का निर्देश दिया गया है।
3. गोपनीय सामग्री के हस्तांतरण पर नजर
प्रश्नपत्र सहित अन्य गोपनीय सामग्री के हस्तांतरण और भंडारण के दौरान निर्धारित एसओपी का पालन करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य परीक्षा सामग्री की सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को कम करना है।
4. मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की होगी तैनाती
परीक्षा के सफल संचालन के लिए स्टैटिक मजिस्ट्रेट, पेट्रोलिंग मजिस्ट्रेट, स्टैटिक पुलिस ऑफिसर, पुलिस बल और केंद्राधीक्षकों की प्रतिनियुक्ति का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। इससे परीक्षा केंद्रों पर कानून-व्यवस्था और निगरानी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
5. अफवाहों पर नजर रखेगा जिला साइबर सेल
परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर नजर रखने के लिए जिला साइबर सेल को सक्रिय रखने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य गलत सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाना और अभ्यर्थियों के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति बनने से रोकना है।
6. जिला स्तर पर बनेगा कंट्रोल रूम
परीक्षा के सुचारु संचालन और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने को कहा गया है। इसके माध्यम से परीक्षा से संबंधित गतिविधियों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर समन्वय किया जा सकेगा।
निष्पक्ष परीक्षा कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी की सीआईडी जांच के बीच जेटेट-2026 के आयोजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 986 केंद्रों पर 5.65 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना प्रशासन के लिए अहम जिम्मेदारी होगी। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, पुलिस और मजिस्ट्रेट की तैनाती, साइबर निगरानी तथा कंट्रोल रूम की व्यवस्था के जरिए परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को कम करने की तैयारी की जा रही है।

