Jind Land Fraud Case : जींद: हरियाणा के जींद में करीब 10 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जींद रियासत की रानी इंद्रजीत कौर और उनकी पुत्रवधू हरसिमरन कौर समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव करने और संपत्ति पर कब्जे की कोशिश के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, रानी ने इन आरोपों को गलत बताते हुए इसे तकनीकी गलती का मामला बताया है।
दादा ने 1965 में खरीदी थी जमीन
रामबीर कॉलोनी निवासी दिल्ली हाईकोर्ट के वकील अभिमन्यु चौधरी के मुताबिक, उनके दादा बलदेव सिंह ने वर्ष 1965 में 50 कनाल 2 मरला जमीन का फार्म हाउस खरीदा था। यह जमीन जींद के अपोलो रोड पर स्थित है। अभिमन्यु का दावा है कि परिवार लंबे समय से इस संपत्ति पर काबिज है।
शिकायत के अनुसार, हरियाणा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जमीन की नौ प्रॉपर्टी आईडी और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करने पर गड़बड़ी सामने आई। आरोप है कि मूल खसरा नंबर 65/58 की जगह रिकॉर्ड में 65/13 दर्ज कर दिया गया। साथ ही, जमीन का कुल रकबा 50 कनाल 2 मरला से घटाकर 18 कनाल 15 मरला दिखाया गया और उसकी लोकेशन में भी बदलाव कर दिया गया।
रजिस्ट्री कराने की कोशिश का भी आरोप
अभिमन्यु चौधरी ने आरोप लगाया कि रानी इंद्रजीत कौर, उनकी पुत्रवधू हरसिमरन कौर, नगर परिषद के सचिव, पटवारी और एक ठेकेदार ने मिलकर जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर की। शिकायतकर्ता का दावा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराने की दो बार कोशिश की गई, लेकिन दोनों बार रजिस्ट्री नहीं हो सकी।
इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने पांचों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रानी इंद्रजीत कौर ने क्या सफाई दी?
रानी इंद्रजीत कौर ने जमीन पर अपना अधिकार बताते हुए दस्तावेजों में जानबूझकर छेड़छाड़ करने के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता की जमीन का खसरा नंबर 65 है, जबकि उनकी जमीन खसरा नंबर 64 में आती है। दोनों संपत्तियां एक-दूसरे के साथ लगी हुई हैं।
रानी के अनुसार, उन्होंने खसरा नंबर 64 की प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए आवेदन किया था। इस दौरान सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों के आधार पर सिस्टम में खसरा नंबर 65 की लोकेशन दर्ज हो गई, जिससे शिकायतकर्ता की संपत्ति की आईडी उनके नाम चढ़ गई। उन्होंने दावा किया कि जिला प्रशासन ने बाद में उस आईडी को फिर से एनए कर दिया।
दोबारा पैमाइश तक यथास्थिति रखने के आदेश
रानी ने बताया कि जमीन की दोबारा पैमाइश होने तक संपत्ति की मौजूदा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि जमीन हड़पने के लिए रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने के आरोप निराधार हैं।
फिलहाल, इस मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों और रानी की सफाई के बीच जमीन के वास्तविक रिकॉर्ड, खसरा नंबर और प्रॉपर्टी आईडी की जांच अहम होगी। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्ड में बदलाव किस वजह से हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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