धर्मेंद्र योगी, खातेगांव। मध्य प्रदेश के देवास जिले के खातेगांव जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत कणा बुजुर्ग में ‘जी राम योजना’ के तहत फर्जी जॉब कार्ड और कागजी निर्माण के जरिए करीब 25 से 30 लाख रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। सहायक सचिव मिथुन सिओटा के गए इस भारी भ्रष्टाचार की परतें खुलने के बाद अब पंचायत और जनपद स्तर के जिम्मेदार अधिकारी अपना पल्ला झाड़ने और सवालों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
सचिव ने झाड़ा पल्ला: “मुझे ऑनलाइन काम नहीं आता”
इस 25-30 लाख रुपये के महाघोटाले को लेकर जब ग्राम पंचायत के मूल सचिव महेश जोशी से बात की, तो उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए पूरी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया। सचिव महेश जोशी ने कहा, “मुझे ऑनलाइन सॉफ्टवेयर चलाना नहीं आता है। पंचायत का पूरा ऑनलाइन सॉफ्टवेयर और पोर्टल का काम सहायक सचिव मिथुन सिओटा ही चलाता है। मुझे इस भ्रष्टाचार की कोई भनक नहीं थी। जब मैंने पेपर में खबर पढ़ी, तब मुझे इसके बारे में पता चला। अभी मामले की जांच चल रही है, रिपोर्ट आने पर ही कुछ पता चलेगा।” एक सचिव का अपनी ही पंचायत में हो रहे लाखों के खेल से पूरी तरह अनजान होना सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
जनपद CEO का टालमटोल रवैया
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब संवाददाता ने जनपद पंचायत सीईओ (CEO) अश्वनी राठौर से फोन पर विस्तृत जानकारी लेनी चाही, तो उनका रवैया भी पूरी तरह टालमटोल वाला रहा। उन्होंने फोन पर केवल इतना कहा कि “मामले की जांच चल रही है।” जब उनसे घोटाले को लेकर सीधे सवाल किए गए, तो उन्होंने फोन पर कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया और बात को टालते हुए कहा, “आप परसों ऑफिस आ जाइए, तब आपको जानकारी दे देंगे।”
क्या है 25-30 लाख का यह महाघोटाला?
सहायक सचिव मिथुन ने मनरेगा वेबसाइट का फायदा उठाते हुए बिना जिला जनपद की अनुमति के अपनी मूल पंचायत कांचीपुरा के 306 जॉब कार्ड कणा बुजुर्ग (बिलोदा और निमोरा) में अप्रूव कर लिए। इसमें उसने अपने सगे भाई और भाभी के भी फर्जी जॉब कार्ड लगा दिए।
70 साल के बुजुर्ग की उम्र 35 बताई
लक्ष्मीनारायण’ और ‘कृष्णा बाई’ नाम से ऐसे जॉब कार्ड बनाए गए, जिनका पूरे देवास जिले में कोई अता-पता नहीं है। लक्ष्मीनारायण की तस्वीर 70 वर्षीय बुजुर्ग की है, लेकिन कागजों में उसकी उम्र 35 साल और कृष्णा बाई की 32 साल दर्शाकर पैसा निकाला गया।
मक्के के खेत में बना दिया कागजी तालाब
ग्राम बिलोदा के किसान सुमेर (पिता मेहताब सिंह ठाकुर) के 4 एकड़ खेत में मक्के की फसल खड़ी है, लेकिन सहायक सचिव ने कागजों में वहां तालाब निर्माण दर्शाकर लाखों रुपये डकार लिए। खुद किसान को नहीं पता कि उसके खेत के नाम पर पैसा निकाला गया है।
राजनीतिक रसूख के चलते प्रशासन मौन
क्षेत्र के जनपद सदस्य कोमल राजवीर कुड़ियां द्वारा कलेक्टर और एसडीएम को लिखित शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले पास के ही कन्नौद जनपद की ग्राम पंचायत बुरुट में ऐसे ही फर्जीवाड़े पर सहायक सचिव पर एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भेजा गया था। लेकिन कणा बुजुर्ग के मामले में आरोपी सहायक सचिव का जुड़ाव सत्ताधारी दल (भाजपा) के नेताओं से बताया जा रहा है। इसी राजनीतिक रसूख के चलते प्रशासन मौन साधे हुए है और 25-30 लाख रुपये के इस खुले गबन को जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है।
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