राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल और विरोध प्रदर्शन पर गए पटवारियों के खिलाफ राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। हाल ही में नियुक्त किए गए परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) वाले लगभग 6 हजार पटवारियों की नौकरी पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। काम में लापरवाही और निर्देशों का पालन न करने के आरोप में जिला कलेक्टरों द्वारा लगातार सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
परिवीक्षा अवधि वाले पटवारियों पर गिरी गाज
राज्य में वर्ष 2023-24 के दौरान करीब 6 हजार नए पटवारियों की नियुक्ति की गई थी, जिनकी तीन साल की परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) चल रही है। नौकरी से छुट्टी: सरकारी निर्देशों और आदेशों का पालन न करने तथा हड़ताल व कार्य बहिष्कार के चलते अब तक प्रदेश के आठ से नौ जिलों में 27 नव नियुक्त पटवारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। प्रोबेशन पीरियड पर असर: शुरुआती सेवाकाल में ही इस प्रकार की बड़ी कार्रवाई से नए पटवारियों में हड़कंप मच गया है।
परमानेंट पटवारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई और अभियोजन स्वीकृति
न सिर्फ नए पटवारी, बल्कि नियमित (परमानेंट) पटवारियों के खिलाफ भी अनुशासनहीनता और लापरवाही के मामले में शिकंजा कसा जा रहा है:निलंबन की कार्रवाई: प्रशासनिक स्तर पर अब तक 75 परमानेंट पटवारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि हजारों नियमित पटवारियों को कारण बताओ (Show Cause) नोटिस जारी किए गए हैं। अभियोजन स्वीकृति जारी: कई जिलों में गंभीर मामलों के चलते पटवारियों के खिलाफ अभियोजन (Prosecution) की भी स्वीकृति दे दी गई है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
संतोष सतनामी (सतना)
सनी द्विवेदी (जबलपुर)
देवेंद्र सहारिया (नर्मदापुरम)
धर्मेन्द्र सिंह राठौर (सीहोर)
मंगलेश खंडेलवाल (भोपाल)
प्रशासनिक सख्ती के इस दौर से राजस्व विभाग के कामकाज और मैदानी अमले पर गहरा असर देखने को मिल रहा है, और आने वाले दिनों में कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
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