Jodhpur Fire में घायल दमकलकर्मियों का हाल जानने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को जयपुर के एसएमएस अस्पताल पहुंचे। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों के इलाज और स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही जोधपुर के चीफ फायर ऑफिसर जलज घसिया से हादसे के बारे में जानकारी ली। गहलोत ने कहा कि इन दमकलकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जान बचाई।

गहलोत ने बताया कि बर्न केस होने के कारण संक्रमण के खतरे को देखते हुए उन्होंने मरीजों से सीधे मुलाकात नहीं की। इसके बजाय अस्पताल के प्रिंसिपल, इलाज कर रहे डॉक्टरों और जोधपुर के चीफ फायर ऑफिसर के साथ बैठक कर घायलों की स्थिति जानी। उन्होंने कहा कि मरीजों का इलाज सही तरीके से चल रहा है और किसी तरह की शिकायत सामने नहीं आई है।
6 दमकलकर्मियों का SMS अस्पताल में इलाज
चीफ फायर ऑफिसर जलज घसिया ने बताया कि आग बुझाने के दौरान अंत में एक बड़ा विस्फोट हुआ। इसके बाद छत गिर गई और केमिकल की टंकी टूट गई। इसी दौरान दमकलकर्मी घायल हुए।
कुल 15 लोग घायल हुए थे। इनमें से दो को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल 7 घायल जोधपुर के अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 6 दमकलकर्मियों का इलाज जयपुर के एसएमएस अस्पताल में चल रहा है।
एसएमएस अस्पताल में भर्ती छह मरीजों में एक करीब 20 फीसदी जला है। बाकी पांच मरीज 50 फीसदी से ज्यादा झुलसे हैं। चीफ फायर ऑफिसर के मुताबिक 50 फीसदी से अधिक जलने की स्थिति गंभीर मानी जाती है। अस्पताल प्रशासन इन मरीजों की लगातार निगरानी कर रहा है।
जान पर खेलकर लोगों को बचाया
अशोक गहलोत ने दमकल अधिकारियों और पूरी फायर फाइटिंग टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाया। उनकी वजह से जनहानि को काफी हद तक रोका जा सका।
गहलोत ने कहा कि हादसे में दमकलकर्मियों के घायल होने का उन्हें दुख है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने इलाज में किसी तरह की कमी नहीं रखने का भरोसा दिलाया है। गहलोत ने सभी घायल अग्निशमन कर्मियों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
संविदाकर्मियों के मुद्दे पर भजनलाल सरकार से आग्रह
अस्पताल दौरे के दौरान गहलोत ने संविदाकर्मियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के समय अस्पतालों और दूसरी जगहों पर काम करने वाले करीब एक लाख संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने का फैसला लिया गया था। गहलोत के मुताबिक सरकार बदलने के बाद यह काम रोक दिया गया।
उन्होंने कहा कि कई संविदाकर्मी 20-25 साल से काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें 7-8 हजार रुपये तक ही मिलते हैं। गहलोत ने कहा कि इन कर्मचारियों की स्थिति सुधारने और बेहतर मानदेय देने के लिए पूर्व सैनिकों की तर्ज पर एक संस्था बनाने का फैसला लिया गया था, जिसके जरिए उन्हें काम मिलना था। उनके अनुसार सरकार बदलने के बाद यह योजना भी बंद हो गई।
सरकार अपना विजन स्पष्ट करे
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल से संविदाकर्मियों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जनहित के फैसलों को इस आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए कि उन्हें पिछली सरकार ने लिया था।
उन्होंने कहा कि नई सरकार को यह देखना चाहिए कि ऐसे फैसलों को किस तरह लागू किया जा सकता है, ताकि गरीबों, कर्मचारियों और समाज के दूसरे वर्गों को सीधा लाभ मिले। गहलोत ने संविदाकर्मियों को नियमित करने और उन्हें स्थायी करने के मुद्दे पर सरकार से आगे आकर अपना विजन स्पष्ट करने की बात कही।
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