रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेराफेरी और परीक्षा परिणाम में अनियमितता को लेकर सीआईडी की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सीआईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट के मुताबिक आयोग की ओर से आयोजित 36 परीक्षाओं में से 9 परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। अन्य परीक्षाओं की जांच अभी जारी है।

चार्जशीट में दावा किया गया है कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) से जुड़े एक कथित सिंडिकेट ने परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया। जांच के दौरान पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेराफेरी, खाली ओएमआर में बाद में गोले भरने और परीक्षा केंद्र के बाहर उत्तर पुस्तिकाएं लिखवाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।

11वीं से 13वीं जेपीएससी: अंकों में हेराफेरी के साक्ष्य

11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा (विज्ञापन संख्या 01/2024) में 342 पदों पर नियुक्ति हुई थी और सफल अभ्यर्थी विभिन्न जिलों में योगदान भी दे चुके हैं।

सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार, साक्षात्कार के दौरान कोडिंग-डिकोडिंग के जरिए परीक्षा परिणाम के अंकों में हेराफेरी के साक्ष्य मिले। तत्कालीन अध्यक्ष के आवास से 15 अभ्यर्थियों के नाम और रोल नंबर से जुड़े दस्तावेज बरामद होने का भी दावा किया गया है। इनमें जेएएस, जेपीएस और आईएफएस जैसे पदों पर बहाली के लिए अनुशंसा और चिह्नित करने से संबंधित साक्ष्य शामिल हैं।

14वीं जेपीएससी: 103 पद, 2204 सफल अभ्यर्थी

14वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था।चार्जशीट के मुताबिक स्ट्रांग रूम में ओएमआर शीट बिना सील के रखे जाने, खाली गोले भरे जाने और अयोग्य अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण कराने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ का मामला भी जांच का हिस्सा है।

FRO परीक्षा: गुप्त ठिकानों पर लिखवाई गईं उत्तर पुस्तिकाएं

वन क्षेत्र पदाधिकारी (एफआरओ) परीक्षा में 170 पदों के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी। जांच में मास्टरमाइंड बताए गए अभय तिवारी, टीडीपीएल के अकाउंटेंट रक्षक सिंह और कोचिंग संचालक संजीत कुमार के रिश्तेदारों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं।

चार्जशीट के अनुसार, मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं कथित तौर पर गुप्त ठिकानों पर लिखवाई गईं। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए जाने की बात कही गई है।

ACF परीक्षा में मॉडल उत्तर बरामद होने का दावा

सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) परीक्षा में 78 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। सीआईडी के मुताबिक मुख्य अभियुक्त अभय तिवारी, सानंद प्रकाश और आदित्य पांडेय की बहन को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

जांच में आदित्य पांडेय के घर से मॉडल उत्तर बरामद होने का दावा किया गया है। इन उत्तरों का फोरेंसिक जांच में उत्तर पुस्तिका से मिलान किए जाने की बात चार्जशीट में कही गई है।

CDPO परीक्षा: डेटा प्रोसेसिंग की आड़ में कथित खेल

बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) परीक्षा में 64 पदों के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी। चार्जशीट के अनुसार, आईटीआई की आड़ में टीडीपीएल के माध्यम से डेटा प्रोसेसिंग कराई गई।

जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया के जरिए अभय तिवारी की पत्नी समेत कई अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

JET 2024: जेल जा चुका था एजेंसी का निदेशक

झारखंड पात्रता परीक्षा (जेईटी) 2024 का आयोजन 26 अप्रैल 2026 को हुआ था। परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी ‘बिंसिस’ एजेंसी को दी गई थी।

सीआईडी की जांच में एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार का नाम भी सामने आया है। चार्जशीट के अनुसार, अरुण कुमार पहले जेएसएससी पेपर लीक मामले में जेल जा चुका था। इसके बावजूद उसे परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल उठे हैं।

सहायक लोक अभियोजक परीक्षा में फर्जी प्रमाण पत्र का मामला

सहायक लोक अभियोजक की नियमित और बैकलॉग प्रारंभिक परीक्षाओं में ऐसे अभ्यर्थियों के चयन का मामला सामने आया है, जिनके कंप्यूटर प्रमाण पत्र कथित तौर पर फर्जी थे या दूसरे राज्यों से जारी किए गए थे।चार्जशीट के अनुसार, बैकलॉग परीक्षा का संचालन भी टीडीपीएल ने किया था।

FSO परीक्षा: सिंडिकेट पर मनमाने तरीके से रिजल्ट तैयार करने का आरोप

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (एफएसओ) परीक्षा का परिणाम भी टीडीपीएल के जरिए कथित सिंडिकेट द्वारा मनमाने तरीके से तैयार किए जाने का आरोप है। जांच के मुताबिक मुख्य आरोपी बताए गए अभय तिवारी ने खुद लिखित परीक्षा पास की और साक्षात्कार में शामिल हुआ।

कई और परीक्षाएं जांच के दायरे में

सीआईडी की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी इस कथित सिंडिकेट से जुड़े अन्य सदस्यों और दूसरी परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की भी जांच कर रही है।

चार्जशीट में सामने आए इन आरोपों से जेपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया और उसकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अब जांच एजेंसी की नजर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उन परीक्षाओं पर है, जिनकी जांच अभी बाकी है।