रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की विवादित भर्तियों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने लंबे समय से लंबित मामलों में बार-बार समय मांगने पर नाराजगी जताते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए अधिकतम दो दिन का समय दिया है। साथ ही, अगला आदेश आने तक भर्ती रद्द करने संबंधी सरकारी अधिसूचना के क्रियान्वयन पर लगी रोक को जारी रखा है।मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को सुबह 10:30 बजे होगी। इस सुनवाई पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं।

हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े हैं मामले

सुनवाई के दौरान अदालत ने इन मामलों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा। पहली श्रेणी में वे मामले हैं, जिनमें सरकार ने भर्ती विज्ञापन रद्द कर दिए हैं। वहीं दूसरी श्रेणी में ऐसे मामले शामिल हैं, जहां चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई।

कोर्ट ने संकेत दिया कि दोनों श्रेणियों के मामलों का सीधा असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। ऐसे में सुनवाई और जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी उचित नहीं है।

CID जांच का हवाला देकर सरकार ने मांगा था समय

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्व रॉय ने अदालत को बताया कि मामले की CID जांच चल रही है। इसी आधार पर सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई।

हालांकि, अदालत सरकार की इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि पहले ही जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया जा चुका था, लेकिन निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। सरकार की ओर से करीब एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया था, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को अब अधिकतम दो दिन में अपना जवाब दाखिल करना होगा।

याचिकाकर्ताओं ने भी सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व महाधिवक्ता एवं सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स समेत अन्य वकीलों ने सरकार की ओर से समय मांगे जाने का विरोध किया।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार ने अचानक अधिसूचना जारी कर उन भर्ती विज्ञापनों को रद्द कर दिया, जिनके आधार पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। उनका दावा है कि कई मामलों में अभ्यर्थियों का चयन होने के बाद नियुक्तियां भी दी जा चुकी थीं और बाद में पूरी प्रक्रिया को रद्द कर सेवाओं पर असर डाला गया।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा कि यदि भर्ती रद्द करने के पीछे सरकार के पास ठोस आधार और साक्ष्य हैं, तो उन्हें रिकॉर्ड पर रखा जाना चाहिए।

इन चार भर्तियों पर रोक बरकरार

हाईकोर्ट ने अपने पूर्व अंतरिम आदेश को जारी रखते हुए सरकार की ओर से भर्ती विज्ञापन रद्द करने संबंधी अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक बनाए रखी है। फिलहाल यह रोक इन प्रमुख भर्तियों से जुड़े मामलों में प्रभावी है—

JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा
JSSC CGL-2023 प्रतियोगिता परीक्षा
CDPO भर्ती परीक्षा
Food Safety Officer (FSO) प्रतियोगिता परीक्षा

इसका मतलब है कि अगले आदेश तक सरकार इन भर्ती विज्ञापनों को रद्द करने संबंधी अपने फैसले को लागू नहीं कर सकेगी।

अलग-अलग याचिकाओं के जरिए चुनौती

मामले से जुड़ी कई याचिकाएं हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। रमेश उरांव एवं अन्य ने JSSC CGL-2023 परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना को चुनौती दी है। वहीं सुभाष मुरमू एवं अन्य ने CDPO भर्ती रद्द किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की है।

इसके अलावा आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज एवं अन्य ने JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के फैसले को चुनौती दी है। सौरभ सिंह एवं अन्य ने Food Safety Officer भर्ती रद्द करने के खिलाफ अदालत का रुख किया है।

18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

अब राज्य सरकार को अदालत के निर्देश के मुताबिक दो दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद 18 सितंबर को सुबह 10:30 बजे मामले की अगली सुनवाई होगी।

हाईकोर्ट के सख्त रुख और भर्ती रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर रोक जारी रहने से इन परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है। अब अगली सुनवाई में सरकार के जवाब और अदालत के रुख से इन भर्तियों के भविष्य को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।