रांची: झारखंड में JPSC-JSSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। बुधवार को JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने रांची में प्रेस वार्ता कर सरकार से परीक्षा प्रणाली में किए जाने वाले सुधारों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि मंच ने परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक रिफॉर्म की मांग उठाई थी। उनके अनुसार, सरकार ने परीक्षाएं रद्द कर दीं, लेकिन रिफॉर्म को लेकर अब तक कोई ठोस प्रक्रिया नजर नहीं आ रही है।

18 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम, नहीं हुआ काम तो महापंचायत

रविंद्र पासवान ने बताया कि मंच की ओर से सरकार को रिफॉर्म के लिए दो महीने का समय दिया गया था। यह समयसीमा 18 अक्टूबर को खत्म होगी। मंच का कहना है कि नई वैकेंसी जारी करने से पहले परीक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार पूरे किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर 18 अक्टूबर तक रिफॉर्म को लेकर सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो उसी दिन छात्र महापंचायत बुलाई जाएगी। इसमें आंदोलन की आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।

आउटसोर्सिंग एजेंसी से परीक्षा नहीं कराने की मांग

मंच ने परीक्षा व्यवस्था में कई बदलावों की मांग रखी है। इनमें आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए परीक्षा नहीं कराने, रिजल्ट के साथ कटऑफ और स्कोर कार्ड जारी करने तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है।

छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार किए बिना केवल नई वैकेंसी जारी करने से पुरानी समस्याएं दोबारा सामने आ सकती हैं।

7 अक्टूबर के बाद महाजुटान के ऐलान से मंच ने किया किनारा

प्रेस वार्ता में रविंद्र पासवान ने 7 अक्टूबर के बाद छात्र महाजुटान को लेकर किए जा रहे दावों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की ओर से फिलहाल ऐसा कोई कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।

मंच 18 अक्टूबर तक सरकार के रुख और रिफॉर्म की प्रक्रिया पर नजर रखेगा। साथ ही मंच ने रिफॉर्म के लिए बनने वाली सरकारी कमेटी में अपने प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की है।

7 अक्टूबर की हाईकोर्ट सुनवाई पर भी नजर

प्रेस वार्ता में 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई का भी जिक्र किया गया। मंच ने सरकार से मांग की कि परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच कर रही राज्य एजेंसी सभी तथ्यों को मजबूती से अदालत के सामने रखे।

रविंद्र पासवान ने CID की जांच की गति पर सवाल उठाते हुए जांच में तेजी लाने और परीक्षा से जुड़े आरोपों की पूरी पड़ताल करने की मांग की।

मास बगलिंग के साथ प्रश्नपत्र लीक के एंगल की जांच की मांग

रविंद्र पासवान ने दावा किया कि सरकार ने अपने जवाब में मास बगलिंग की बात स्वीकार की है, लेकिन अब तक 36 गिरफ्तारियां ही हुई हैं। उनका कहना था कि यदि जांच एजेंसी मास बगलिंग के पहलू पर जांच कर रही है, तो परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर आने के आरोपों की भी पड़ताल होनी चाहिए।मंच ने संबंधित अधिकारियों से पूछताछ और कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने की मांग की है।

CBI जांच की PIL पर 5 अक्टूबर को सुनवाई

मंच के नेताओं ने बताया कि 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग वाली PIL पर सुनवाई होनी है। रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि सरकार CBI जांच से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रख रही है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख रही है, उसी तरह हाईकोर्ट में भी परीक्षा से जुड़े सभी तथ्यों को मजबूती से रखा जाना चाहिए।

छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग

पीयूष ने छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज FIR का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि आंदोलन के दौरान हिंसा नहीं हुई, इसके बावजूद छात्रों पर मामले दर्ज किए गए। मंच ने सरकार से छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की।

इसके साथ ही JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों की तत्काल नियुक्ति की मांग भी की गई। मंच का दावा है कि रिफॉर्म के लिए गठित सरकारी कमेटी की अब तक एक भी बैठक नहीं हुई है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट और कमेटी की बैठक पर सवाल

कुणाल प्रताप ने कहा कि मंच ने परीक्षा मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग की थी और इसकी घोषणा भी हुई, लेकिन इसकी प्रक्रिया जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है।

उन्होंने अमिताभ कौशल की ओर से गठित कमेटी की बैठक नहीं होने का आरोप लगाया। साथ ही JSSC सचिव सुधीर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर भी सवाल उठाए। मंच ने परीक्षा व्यवस्था में सामने आई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग की।

22 रद्द परीक्षाओं पर मंच की नजर

कुणाल प्रताप ने कहा कि मंच रद्द की गई सभी 22 परीक्षाओं के मुद्दे को उठा रहा है। उनके अनुसार, CBI जांच से जुड़ी PIL में मंच की ओर से दो हस्तक्षेप हैं और सुप्रीम कोर्ट में एक अन्य रिट भी दाखिल की गई है।

मंच ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित व्यापक नेटवर्क की जांच के लिए CBI जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार को 18 अक्टूबर तक परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए।