रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की कथित धांधली और फर्जी डिग्री से जुड़े मामलों में जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार को CID की टीम ने रांची स्थित YBN यूनिवर्सिटी में पहुंचकर कई दस्तावेज और रिकॉर्ड की पड़ताल की। इसी दौरान परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच अब संभावित नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
यूनिवर्सिटी पहुंची CID, रिकॉर्ड की जांच
CID की टीम सोमवार को YBN यूनिवर्सिटी पहुंची और संस्थान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। सूत्रों के मुताबिक, उस समय विश्वविद्यालय के संचालक वहां मौजूद नहीं थे।
जांच टीम ने जरूरी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर उनकी पड़ताल शुरू की है। फर्जी डिग्री से जुड़े मामलों में इन दस्तावेजों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
शिवांगन कोचिंग का संचालक गिरफ्तार
CID ने रांची के सुखदेव नगर थाना क्षेत्र निवासी संजीत कुमार (38) को गिरफ्तार किया है। संजीत शिवांगन कोचिंग का संचालक बताया गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कोचिंग संचालन के अलावा वह कथित तौर पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित तरीके से सफल कराने के लिए एजेंट के रूप में भी काम करता था। उसका नाम JPSC परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामले में सामने आया है।
CGL परीक्षा में भी सामने आया संदिग्ध कनेक्शन
दूसरी गिरफ्तारी दिलीप कुमार पासवान (41) की हुई है। CID के मुताबिक, दिलीप JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितता में शामिल था। वह पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के नवकाडीह में रह रहा था, जबकि उसका मूल पता बिहार के जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र का बताया गया है।
अभ्यर्थियों से पैसे लेने का आरोप
CID के अनुसार, दिलीप ने कथित तौर पर कई अभ्यर्थियों से पैसे लिए और उन्हें परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की। आरोप है कि वह कुछ छात्रों को आसनसोल लेकर गया था, जहां उन्हें परीक्षा से जुड़े प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए गए।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में और कितने लोग शामिल हैं और अभ्यर्थियों तक परीक्षा से जुड़ी जानकारी किस माध्यम से पहुंचाई गई।
पूछताछ से खुल सकता है पूरा नेटवर्क
दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर CID मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच में JPSC-JSSC परीक्षा में कथित धांधली, फर्जी डिग्री और उससे जुड़े संस्थानों व लोगों के नेटवर्क को केंद्र में रखा गया है। यूनिवर्सिटी से मिले दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में आगे और कार्रवाई होने की संभावना है।



