रांची। झारखंड हाईकोर्ट में JSSC-CGL नियुक्ति रद्द करने के मामले में गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई। राज्य सरकार समेत सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं, JPSC से जुड़े मामले में शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।

सरकार ने नियुक्ति रद्द करने के फैसले को ठहराया उचित

JSSC-CGL नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट अदालत में पेश की गई थी।

सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने नियुक्ति रद्द करने के फैसले को उचित ठहराया। सरकार ने परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितता और वित्तीय लेन-देन का हवाला देते हुए कहा कि मामले में 28 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच अभी जारी है।

सरकार की ओर से दलील दी गई कि ऐसी स्थिति में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर CGL समेत अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले का बचाव किया।

याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा रद्द करने का किया विरोध

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने का विरोध किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने दलील दी कि प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है। उनके अनुसार किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने की बात भी सामने नहीं आई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि मामला परीक्षा से पहले संभावित प्रश्नों की जानकारी मिलने से जुड़ा हो सकता है। सुनवाई के दौरान नेपाल में 28 अभ्यर्थियों द्वारा संभावित प्रश्नों को याद किए जाने और उनमें से 10 के सफल होने का भी उल्लेख किया गया।इन अभ्यर्थियों का परिणाम हाईकोर्ट के आदेश से रोका गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था।

दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि पिछली न्यायिक कार्यवाही में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने की बात सामने आई थी। उनका कहना था कि आपराधिक मामले की स्थिति के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि SIT की जांच दो साल से अधिक समय से चल रही है, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कौन अभ्यर्थी दोषी है और कौन निर्दोष।

हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का भी दिया गया हवाला

अन्य अधिवक्ताओं की ओर से भी दलील दी गई कि JSSC-CGL मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई आदेश पारित कर चुके हैं। इन आदेशों में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने तथा आपराधिक मामलों की स्थिति के आधार पर नियुक्ति आगे बढ़ाने से जुड़े निर्देशों का उल्लेख किया गया था।याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इसके बावजूद राज्य सरकार ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया।

अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार

सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने JSSC-CGL नियुक्ति रद्द करने के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है।वहीं, JPSC से जुड़े मामले में शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी, जिसमें राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।