हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जजों की कमी और लंबित मामलों की सुनवाई में हो रही देरी का मुद्दा अब मुख्य न्यायाधिपति अल्पेश यशवंत केगजे तक पहुंच गया है। उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ, इंदौर के अध्यक्ष मनीष यादव और कार्यकारिणी ने मुख्य न्यायाधिपति के सात दिवसीय इंदौर प्रवास के दौरान न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को बिंदुवार आंकड़ों और लिखित दस्तावेजों के साथ उनके सामने रखा।
अधिवक्ता संघ ने इंदौर बेंच में जजों की कमी का हवाला देते हुए तत्काल तीन अतिरिक्त जजों की मांग की। संघ के अध्यक्ष मनीष यादव के मुताबिक, इस पर मुख्य न्यायाधिपति ने जल्द से जल्द दो जज इंदौर बेंच भेजे जाने के लिए आश्वस्त किया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ता संघ के लिए अलग जगह उपलब्ध कराने की मांग पर भी सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई गई है।
जजों की कमी से सुनवाई में देरी, अधिवक्ता संघ ने रखे आंकड़े
अधिवक्ता संघ ने मुख्य न्यायाधिपति के सामने इंदौर बेंच में न्यायाधीशों की उपलब्धता और मामलों की सुनवाई में आ रही परेशानियों को प्रमुखता से उठाया। संघ की ओर से बताया गया कि जजों की कमी का असर न्यायिक कामकाज और मामलों की सुनवाई पर पड़ रहा है।अ ध्यक्ष मनीष यादव ने लिखित आंकड़ों के जरिए इस समस्या को समझाते हुए तीन जजों की मांग रखी।
उनका उद्देश्य इंदौर बेंच में न्यायिक क्षमता बढ़ाना और लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की दिशा में कदम उठाना है।अब मुख्य न्यायाधिपति की ओर से दो जज भेजे जाने के आश्वासन के बाद अधिवक्ता समुदाय की निगाहें इस फैसले के अमल पर रहेंगी। हालांकि, जजों की नियुक्ति या पदस्थापना से संबंधित अंतिम स्थिति आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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