प्रमोद कुमार, कैमूर। जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय लोहरा में अतिक्रमण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के मुख्य गेट पर मवेशी बांधे जाते हैं, परिसर में गोबर के उपले सुखाए जाते हैं और छत पर सरसों रखी जाती है। इससे स्कूल में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस समस्या से परेशान दर्जनों ग्रामीणों ने कैमूर के डीएम कुमार अनुराग को आवेदन देकर कार्रवाई की गुहार लगाई है।

मुख्य गेट से लेकर छत तक निजी इस्तेमाल

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल के मुख्य गेट से लेकर ग्राउंड और छत तक का इस्तेमाल निजी कामों के लिए किया जा रहा है। स्कूल परिसर में मवेशियों को बांधने और उपले रखने से बच्चों को परेशानी होती है। वहीं, छत पर सरसों सुखाए जाने से भी स्कूल का इस्तेमाल प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अतिक्रमण हटवाकर बच्चों की पढ़ाई के लिए उचित व्यवस्था करने की मांग की है।

जमीन विवाद के कारण स्कूल पर अतिक्रमण का आरोप

ग्रामीणों के मुताबिक, प्राथमिक विद्यालय लोहरा की जमीन बिहार सरकार की नहीं, बल्कि निजी जमीन है। जिस व्यक्ति ने स्कूल बनाने के लिए जमीन दान दी थी, उसने बाद में उसी जमीन को तीन से चार लोगों को बेच दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन को लेकर विवाद के कारण स्कूल की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। इससे स्कूल में पठन-पाठन का माहौल प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल के पास बिहार सरकार की करीब एक एकड़ 30 डिसमिल जमीन उपलब्ध है। वे चाहते हैं कि इस जमीन पर स्कूल का भवन बनाया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से हो सके और जमीन विवाद के कारण होने वाली परेशानी से छुटकारा मिले।

डीएम से लगाई न्याय की गुहार

लोहरा गांव के ग्रामीण उमेश कुमार यादव और रोशन कुमार यादव का कहना है कि गांव के कई लोगों ने प्राथमिक विद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है। उनका आरोप है कि कुछ लोग जमीन को अपनी बताते हुए स्कूल के मुख्य गेट पर मवेशी बांधते हैं, ग्राउंड में गोबर के उपले रखते हैं और छत पर सरसों सुखाते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई में बाधा आती है।

ग्रामीणों के अनुसार, इस समस्या को लेकर चैनपुर के अंचलाधिकारी को भी आवेदन दिया गया है। अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पास में उपलब्ध सरकारी जमीन पर स्कूल का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सके।

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