प्रमोद कुमार, कैमूर। जिले के सहकारिता विभाग में 16 करोड़ रुपये के भारी गबन और फर्जी धान खरीद का बड़ा मामला सामने आया है। चैनपुर प्रखंड के जगिरिया पैक्स पर वित्तीय वर्ष 2021 से 2026 के बीच बिना खेत वाले और फर्जी किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का आरोप लगा है। इस सनसनीखेज खुलासे से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

​चाय विक्रेता और ठेला चालकों को बना दिया किसान

​चैनपुर प्रखंड के जगिरिया पंचायत के शेरपुर निवासी किसान चंद्रशेखर सिंह ने इस पूरे घोटाले के पुख्ता साक्ष्य सहकारिता मंत्री, जिला अधिकारी और जिला सहकारिता पदाधिकारी को सौंपे हैं। आरोप है कि पैक्स द्वारा लगभग 200 फर्जी किसानों को कागजों पर खड़ा कर लाखों रुपये की अवैध निकासी की गई है।
​हैरानी की बात यह है कि चैनपुर बाजार में चाय बेचने वाले अभिमन्यु चौरसिया जैसे लोगों के नाम पर, जिनके पास अपनी कोई जमीन नहीं है, हर साल 100 क्विंटल धान की फर्जी खरीद और बिक्री दिखाई गई। इसके अलावा, पैक्स अध्यक्ष संजय पांडेय के पास खुद लगभग 5 एकड़ जमीन है, लेकिन उन्होंने अपने परिवार के 4 से 5 सदस्यों के नाम पर हर साल तय सीमा (250 क्विंटल) से अधिक यानी 750 क्विंटल धान की फर्जी बिक्री दिखाकर सरकारी राशि डकार ली।

​असली किसानों के उड़े होश

​घोटाले का शिकार हुए स्थानीय किसानों को जब इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली तो उनके होश उड़ गए। किसान संजय सिंह का आरोप है कि उनकी निजी जमीन के कागजात का गलत इस्तेमाल कर हर साल फर्जी धान खरीद दिखाई जाती रही और लाखों रुपये निकाले गए। वहीं, एक अन्य किसान ने बताया कि वह दूसरों की जमीन लेकर खेती करता है, बावजूद इसके उसके नाम पर 100 क्विंटल धान की खरीद दिखाई गई। उसके खाते में 80 हजार रुपये आए भी थे, लेकिन उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि यह किस मद का पैसा है।

​डीएम कुमार अनुराग ने दिए जांच के आदेश

​मामले की गंभीरता को देखते हुए कैमूर के जिलाधिकारी (DM) कुमार अनुराग ने कार्रवाई का कदम उठाया है। डीएम ने बताया कि किसान द्वारा दिए गए आवेदन और साक्ष्यों की जांच के लिए जिला सहकारिता पदाधिकारी को आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो आगामी धान खरीद प्रक्रिया से पहले सभी दोषी जनप्रतिनिधियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
​इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि जब अकेले चैनपुर के एक पैक्स में 16 करोड़ रुपये का गबन हो सकता है, तो पूरे जिले के करीब 150 पैक्सों का क्या हाल होगा? जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस भ्रष्टाचार में लिप्त कौन-कौन से चेहरे बेनकाब होते हैं और उन पर क्या कार्रवाई होती है।