राकेश कथूरिया, कैथल. एक तरफ जहां जिला पुलिस द्वारा निरंतर आमजन को साइबर अपराधों से बचाव बारे जागरूक किया जा रहा है। वहीं एसपी मनप्रीत सिंह सूदन के कुशल नेतृत्व में साइबर ठगो पर शिकंजा भी कसा जा रहा है। इसी कड़ी में साइबर अपराध थाना कैथल ने एक व्यक्ति से विदेशी महिला बनकर दोस्ती करने, फर्जी बैंक खाता खुलवाने तथा कस्टम ड्यूटी, बैंक चार्ज, वैट कोड व धनराशि रिफंड कराने के नाम पर 8 लाख 75 हजार रुपये की साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।


जांच अधिकारी एसआई रविंद्र कुमार ने बताया की जनकपुरी कॉलोनी कैथल, निवासी एक व्यक्ति जो कि वरिष्ठ नागरिक हैं, को फरवरी 2025 में उसकी फेसबुक मैसेंजर पर जॉनसन डेनियल नाम की महिला की आईडी से संदेश आने शुरू हुए। शुरुआत में शिकायतकर्ता ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन बाद में बातचीत शुरू होने पर उक्त महिला ने स्वयं को यूनाइटेड किंगडम के मैनचेस्टर शहर की निवासी बताया। धीरे-धीरे दोनों के बीच नियमित बातचीत होने लगी और महिला ने शिकायतकर्ता का व्हाट्सएप नंबर प्राप्त कर लिया।

आरोपियों द्वारा सुनियोजित तरीके से विश्वास कायम करने के लिए महिला की फोटो, महंगे उपहारों की तस्वीरें, हवाई टिकट तथा फ्लाइट में यात्रा करते हुए फोटो भेजे गए। महिला ने शिकायतकर्ता को बताया कि वह भारत घूमने आ रही है और यहां उसका कोई परिचित नहीं है। 5 मार्च 2025 को शिकायतकर्ता के पास स्वयं को मुंबई एयरपोर्ट कर्मचारी बताने वाली एक महिला का फोन आया, जिसने बताया कि विदेशी महिला भारत पहुंच चुकी है, लेकिन उसके पास बड़ी मात्रा में ब्रिटिश पाउंड होने के कारण कस्टम विभाग ने उसे रोक रखा है।

इसके बाद कस्टम ड्यूटी, क्लियरेंस चार्ज तथा अन्य सरकारी शुल्कों के नाम पर शिकायतकर्ता से अलग-अलग मोबाइल नंबरों और बैंक खातों में रकम जमा करवाई जाने लगी। आरोपियों ने शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि जमा करवाई गई पूरी राशि बाद में वापस कर दी जाएगी। शिकायतकर्ता से पहले 29,500 रुपये, फिर 19,500 रुपये, 13,000 रुपये तथा 30,000 रुपये सहित कई किस्तों में रकम ट्रांसफर करवाई गई। आरोपियों ने शिकायतकर्ता को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए रोते हुए वीडियो भेजे और महिला को छुड़वाने के नाम पर लगातार पैसों की मांग करते रहे। इसके बाद शिकायतकर्ता से बैंक खाता और पहचान संबंधी दस्तावेज भी हासिल कर लिए गए।

आरोपियों ने फर्जी बैंकिंग प्रक्रिया के तहत शिकायतकर्ता के नाम पर कथित विदेशी बैंक का डिजिटल खाता खोलने का नाटक किया तथा उसे एक लिंक भेजकर बताया कि उसके खाते में विदेशी मुद्रा ट्रांसफर कर दी गई है। आरोपियों ने शिकायतकर्ता को डाक के माध्यम से एक कथित अंतरराष्ट्रीय बैंक का एटीएम कार्ड भी भेजा। बाद में स्वयं को बैंक कर्मचारी और बैंक मैनेजर बताने वाले व्यक्तियों ने एटीएम कार्ड सक्रिय करने, विदेशी मुद्रा जारी करने, वैट कोड प्राप्त करने तथा बैंकिंग औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर बार-बार रुपये जमा करवाए। शिकायतकर्ता को विश्वास दिलाया जाता रहा कि करोड़ों रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा उसके खाते में जमा है और सभी शुल्क जमा होते ही रकम उसके खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।


झांसे में आए शिकायतकर्ता ने अपने साथ-साथ अपने परिचित जयप्रकाश के बैंक खातों से भी विभिन्न मोबाइल नंबरों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य डिजिटल माध्यमों से लगातार रकम भेजी। मार्च से मई 2025 के बीच आरोपियों ने अलग-अलग बहानों से कुल 8 लाख 75 हजार रुपये की ठगी कर ली। जब काफी समय बीतने के बाद भी कोई रकम वापस नहीं मिली तो शिकायतकर्ता को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ। जिस बारे थाना साइबर क्राइम में मामला दर्ज किया गया।