कैथल। कैथल शहर थाना पुलिस ने सेक्टर-21 हुडा में ई-नीलामी के जरिए प्लॉट दिलाने और उसमें हिस्सेदारी देने के नाम पर कथित तौर पर लाखों रुपये की ठगी के मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों में पुलिस विभाग में कार्यरत मदनलाल, कपिल शर्मा और मदनलाल का बेटा अजय शामिल हैं। शिकायत के मुताबिक, इस मामले में करीब 17 लाख रुपये की रकम लेने के बाद कथित तौर पर ऐसी रसीद भी दी गई, जिसे हुडा कार्यालय से सत्यापन कराने पर शिकायतकर्ता ने फर्जी बताया।
शिकायतकर्ता अमित सिकरी ने पुलिस को बताया कि मदनलाल उसका पड़ोसी है और उसके परिवार से पहले से परिचित था। इसी भरोसे के चलते उसने मदनलाल की बताई प्रॉपर्टी डील में पैसा लगाने की हामी भरी। शिकायत के अनुसार, मदनलाल ने दावा किया था कि वह कपिल शर्मा के साथ मिलकर जमीन और प्लॉट की खरीद-फरोख्त करता है तथा सेक्टर-21 हुडा में कुछ प्लॉट ई-नीलामी के जरिए उपलब्ध होने वाले हैं।
आरोप है कि बाजार दर की तुलना में कम कीमत पर प्लॉट दिलाने और हुडा अधिकारियों से संपर्क होने की बात कहकर शिकायतकर्ताओं को निवेश के लिए तैयार किया गया। इसी क्रम में प्लॉट नंबर 1373 में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की बात सामने आई। शिकायत के मुताबिक, इसके लिए 1.38 लाख रुपये ऑनलाइन भेजे गए, जबकि 5.52 लाख रुपये कपिल शर्मा के खाते से हुडा के खाते में जमा कराए गए।
ई-नीलामी में उक्त प्लॉट करीब 1 करोड़ 79 लाख 96 हजार रुपये में खरीदे जाने की बात शिकायत में कही गई है। प्लॉट आवंटन के बाद निर्धारित रकम जमा कराने के नाम पर शिकायतकर्ताओं से आगे भी भुगतान कराया गया। आरोप है कि 10 प्रतिशत राशि के लिए 7.23 लाख रुपये ऑनलाइन और एक लाख रुपये नकद दिए गए। इसके बाद 1 अप्रैल 2025 को 6.75 लाख रुपये ऑनलाइन तथा 1.02 लाख रुपये नकद देने का भी शिकायत में उल्लेख है।
मामले में नया मोड़ तब आया, जब शिकायतकर्ताओं ने जून 2026 में हुडा कार्यालय से प्लॉट की स्थिति के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया। शिकायत के अनुसार, उन्हें पता चला कि प्लॉट से संबंधित निर्धारित 15 प्रतिशत राशि जमा नहीं हुई थी। इसके बाद मदनलाल की ओर से 26 लाख 99 हजार 700 रुपये की एक रसीद दिए जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि जब इस रसीद का पंचकूला स्थित हुडा कार्यालय से सत्यापन कराया गया तो विभागीय रिकॉर्ड में ऐसी रसीद जारी होने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि शुरुआत में करीब 45 दिन में पैसा लौटाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में रकम वापस करने से इनकार कर दिया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मदनलाल ने पुलिस विभाग में अपनी नौकरी का हवाला देते हुए शिकायतकर्ताओं को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को यह भी बताया कि आरोपियों के साथ हुई बातचीत रिकॉर्ड की गई है।
पुलिस रिकॉर्ड में मदनलाल को एएसआई बताया गया है, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार वह वर्तमान में करनाल आईजी के एसए (सिक्योरिटी एजेंट) के तौर पर कार्यरत है। शहर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डीएसपी रमेश चंद ने भी तीन आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।
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