करनाल की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मीनाक्षी यादव ने नशा निषेध केंद्र का दौरा कर मरीजों से संवाद किया और पौधारोपण कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

सुमन चौहान, करनाल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय कुमार शारदा के मार्गदर्शन में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) एवं प्राधिकरण की सचिव मीनाक्षी यादव ने शनिवार को करनाल के सिविल अस्पताल में स्थापित नशा निषेध केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां उपचार ले रहे मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद स्थापित किया। सीजेएम ने नशे की दलदल से बाहर निकलने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की मरीजों की सकारात्मक पहल की भरपूर सराहना की। उन्होंने मरीजों को भविष्य में नशा न करने के लिए संकल्पबद्ध होने के लिए प्रेरित किया और उनका उत्साहवर्धन करने के उद्देश्य से उन्हें पौधे भेंट किए।

मरीजों का मनोबल बढ़ाया और प्रेरित

निरीक्षण के दौरान सीजेएम मीनाक्षी यादव ने परिजनों को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि नशे की लत छोड़ने की प्रक्रिया में मरीजों के साथ धैर्यपूर्ण व्यवहार करना आवश्यक है। उन्होंने परिजनों से अपील की कि वे अपने प्रियजनों को नशे से दूर रखने के लिए निरंतर सहायक बनें और उन्हें मानसिक मजबूती प्रदान करें। इस दौरान सीजेएम मीनाक्षी यादव के साथ डॉ. सौभाग्य, काउंसलर हर्ष वत्स और हरीश भी मौजूद रहे। टीम ने अस्पताल के हर्बल पार्क में मरीजों के साथ मिलकर पौधारोपण किया, जिसका उद्देश्य न केवल पर्यावरण को हरा-भरा बनाना था, बल्कि लोगों को स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रोत्साहित करना भी था।

सकारात्मक संदेश और नशा मुक्त समाज

यह निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समाज में नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता लाने के प्रयासों का हिस्सा है। सीजेएम ने मरीजों और उपस्थित स्टाफ के साथ मिलकर पौधारोपण करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक पौधे को सींचकर उसे वृक्ष बनाया जाता है, उसी प्रकार सही मार्गदर्शन और उपचार से व्यक्ति को पुन: सामान्य और स्वस्थ जीवन में लौटाया जा सकता है। प्राधिकरण का लक्ष्य जिले को नशा मुक्त बनाना है और इस दिशा में ऐसे निरीक्षण निरंतर जारी रहेंगे। सीजेएम ने नशा निषेध केंद्र की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया और अस्पताल प्रबंधन को मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।