करनाल. नगर निगम आयुक्त सलोनी शर्मा के निर्देशानुसार शहर में कचरा पृथक्करण (सोर्स सेग्रीगेशन) को लेकर सूचना, शिक्षा एवं संचार (आई.ई.सी.) गतिविधियों में व्यापक स्तर पर तेजी लाई गई है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत नागरिकों को घर-घर जाकर जागरूक किया जा रहा है, ताकि शहर में शत-प्रतिशत कचरा पृथक्करण के लक्ष्य को समयबद्घ तरीके से प्राप्त किया जा सके।

नगर निगम आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वच्छ एवं सुंदर शहर के निर्माण में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को घर से ही गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने तथा निर्धारित श्रेणी के अनुसार कचरे का निस्तारण करने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक कचरे का पृथक्करण स्रोत स्तर पर नहीं होगा, तब तक वैज्ञानिक एवं प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संभव नहीं हो सकता। इन निर्देशों के अनुपालना में अतिरिक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार के नेतृत्व में जोन प्रभारियों एवं उनके अधीन कार्यरत स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की टीमों ने एक-एक वार्ड लेकर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। टीमें प्रतिदिन कूड़ा एकत्रीकरण वाहन के साथ-साथ पैदल चलकर डोर-टू-डोर भ्रमण कर नागरिकों, दुकानदारों एवं संस्थानों को कचरा पृथक्करण के महत्व के बारे में जानकारी दे रही हैं। साथ ही लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि अलग-अलग प्रकार के कचरे को अलग-अलग एकत्रित करने से उसका वैज्ञानिक निस्तारण आसान होता है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है तथा शहर की स्वच्छता व्यवस्था अधिक प्रभावी बनती है।

चार रंगों के कूड़ेदानों के उपयोग की दी जा रही जानकारी

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की टीम द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुरूप चार प्रकार के कूड़ेदानों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। नागरिकों को बताया जा रहा है कि प्रत्येक प्रकार के कचरे को निर्धारित रंग के डस्टबिन में ही डालें, ताकि उसके सुरक्षित संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक निस्तारण में सुविधा हो।

हरा कूड़ेदान (गीला/जैविक कचरा)- इसमें रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा जैसे सब्जियों एवं फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन, चाय की पत्ती, फूल-पत्तियां, बगीचे का जैविक कचरा तथा अन्य सडऩे-गलने योग्य सामग्री डाली जाएं।

नीला कूड़ेदान (सूखा एवं पुनर्चक्रण योग्य कचरा)- इसमें कागज, गत्ता, प्लास्टिक, बोतलें, धातु, कांच, पैकेजिंग सामग्री, सूखा प्लास्टिक तथा अन्य पुनर्चक्रण योग्य वस्तुएं डाली जाएं।

लाल कूड़ेदान (बायोमेडिकल और संक्रामित अपशिष्टï)- इसमें सैनिटरी नैपकिन, डायपर, टिश्यू, इस्तेमाल किए गए बैंडेज व रुई, संक्रमित दस्ताने, एक्सपायरी दवाईयां और इंजेक्शन की सुईयों जैसे बायोमेडिकल और संक्रामित अपशिष्ट डाला जा सकता है।

काला कूड़ेदान (घरेलू अस्वीकृत/अक्रिय अपशिष्ट)- इसमें इस्तेमाल की हुई बैटरी व सेल, इलेक्ट्रोनिक कचरा, पेंट, केमिकल, कीटनाशकों के डिब्बे, टूटे हुए कांच, बल्व या ट्यूबलाईट तथा ऐसा कचरा जिसे पुनर्चक्रित या जैविक रूप से निस्तारित नहीं किया जा सकता, डाला जाए।

निगमायुक्त ने कहा कि स्वच्छ शहर का आधार घर से शुरू होने वाला कचरा पृथक्करण है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर एवं प्रतिष्ठान पर ही कचरे को अलग-अलग एकत्रित करेगा, तो न केवल नगर निगम की सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के पुनर्चक्रण तथा लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि नगर निगम की स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) टीमों का सहयोग करें।

घरों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करें तथा केवल पृथक किया हुआ कचरा ही सफाई कर्मियों को सौंपें। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही करनाल को स्वच्छ, सुंदर एवं पर्यावरण अनुकूल शहर बनाया जा सकता है।